PSC GS ATOM

A Complete free Guidance to get a PSC white collar job.We provides Study Materials , important points based on exam syllabus. Which we think our readers shoud not miss. For any PSC exams, we provide NCERT Based notes, study material, Current Affairs, Daily News, History, Geography,Polity,Economy,Science notes, Model Papers and all other study material which is important for UPPCS, SSC, UPSC, MPPSC, BPSC, RPSC, RO/ARO and other state Exam.

Breaking

Wednesday, August 15, 2018

भारत : संरचनाओं का महत्व


                       भारत : भू -गर्भिक संरचनाओं का महत्व



प्रायद्वीपीय पठार का महत्व :-

  • यहां अनेक जलप्रपात मिलते हैं जिनसे यहां जल  विद्युत उत्पादन संभव है। 
  • दक्कन के लावा पत्थर के अपरदन एवं अपक्षयन  से उपजाऊ काली मिटटी निर्मित हुई जो कपास की खेती के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। 
  • पश्चिमी घाट के उच्च वर्षा वाले समतल उच्च भागों पर लैटेराइट मिटटी का  निर्माण हुआ , जिन पर मसाला , चाय,काफी आदि की खेती की जाती है। 
  • प्रायद्वीपीय पठार की शेष भागों की लाल मिट्टियों में मोटे अनाज , चावल, तम्बाकू,  खेती होती है। 
  • पश्चिमी घाट  के अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में सदाहरित वन पाए जाते हैं यहां सागौन , महोगनी , आबनूस, चन्दन , बांस आदि मिलते है। काम वर्षा वाले भागों में घास भूमि पायी जाती है। 
  • प्रायद्वीपीय पठार खनिज संसाधनों की दृष्टि से बहुत ही संपन्न क्षेत्र है। यहां सोना , तांबा, लोहा, यूरेनियम, बाक्साइट , कोयला , मैंगनीज आदि प्रमुख रूप से पाए जाते है। 
  • छोटा नागपुर पठार को "भारत का रुर " कहा  जाता है। 
  • पठारी भाग के तटीय भागों पर अनेक खाड़ियाँ और लैगून मिलते हैं। 
हिमालयी भाग  का महत्त्व :-
  • हिमालय क्षेत्र में आने वाले निरंतर भूकंप, हिमालयी नदियों के निरंतर होते मार्ग परिवर्तन ,पीरपंजाल श्रेणी के 1500 से 1850 मीटर की ऊंचाई पर मिलने वाले झील निक्षेप "करेवा " हिमालय के उत्थान के अभी भी जारी रहने की तरफ संकेत करते हैं। 
  • भारत की जलवायु निर्धारण में इसकी प्रमुख भूमिका है , यह जाड़ों में आने वाली ध्रुवीय हवाओं को भारत में आने से रोकता है ,वर्षा काल में यह मानसूनी हवाओं को रोककर भारतीय भू  भाग पर पर्याप्त वर्षा कराता है। 
  • यह हिमालयी नदियों को वर्ष वाहिनी बनाता है। 
  • हिमालयी नदियां अपने साथ बड़ी मात्रा में अवसाद ले आती हैं जिनसे उपजाऊ जलोढ़ मैदान बनते हैं। 
  • इनमे सबसे अच्छी गुणवत्ता वाला एन्थ्रेसाइट कोयला भी उपलब्ध है जो की कारगिल क्षेत्र के रियासी में मिलता है। 
  • यहां कोबाल्ट , निकल , जस्ता , तांबा , एंटीमनी , बिस्मथ जैसे धात्विक खनिज संसाधन , लेकिन इसकी जटिल भू गर्भिक संरचना के कारण धात्विक खनिजों का खनन अभी संभव नहीं हो सका  है। 
  • यहां शीशम , देवदार , चीड़ , सागौन, ओक आदि के वन पाए जाते हैं जो की उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण बनाते हैं। 
  • इन वैन क्षेत्रों में दुर्लभ जड़ी बूटियां भी मिलती हैं जिस पर हमारा आयुर्वेदिक उद्योग टिका है। 
  • हिमालय पर्यटकों का आकर्षण केंद्र भी रहा है एवं इसका अपना एक सांस्कृतिक महत्व भी रहा है। 
मैदानी भागों का महत्त्व :-
  • मैदानी भाग हमारी जनसँख्या के जीवन का आधार है , क्योंकि इसकी उपजाऊ जलोढ़ मृदा में विभिन्न  तरह के फसल उपजाए जा सकते हैं। 
  • इससे हमारे जनसंख्या व पशुओं को आहार की प्राप्ति होती है , साथ ही अनेक उद्योगों को कच्चा मॉल भी प्राप्त होता है। 
  • नदियों का क्षेत्र होने के कारण यह नहरों का विकास कर सिचाई का कार्य भी किया जाता है साथ ही परिवहन का मार्ग भी प्रशस्त किया जा रहा है। 
  • मैदानी भागों में भूमिगत जल का भी वृहद भंडार है जिनसे पीने के पानी की आपूर्ति की जाती है। 
  • अवसादी भू गर्भिक संरचना के कारण ये पेट्रोलियम पदार्थों के संभावित संचित भंडार हैं। 
  • समतल भूमि के कारण यहां रेल और सड़क का समुचित विकास किया जा रहा है। 

No comments:

Post a Comment

Recent Post

GUPTA EMPIRE

मौर्य सम्राज्य के विघटन के बाद भारत में दो बड़ी राजनैतिक शक्तियां उभर कर आई सातवाहन और कुषाण।  सातवाहनों ने दक्षिण में स्थायित्व प्रद...