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Sunday, June 3, 2018

DESERTs & ISLAND of INDIA




भारतीय मरुस्थल :-

विशाल भारतीय मरुस्थल  अरावली पहाड़ियों से उत्तर -पूर्व में स्थित है।
यह एक उबड़ खाबड़ भूतल है जिसपर बहुत से रेट के टीले और बरखान पाये जाते हैं।
यहां वार्षिक वर्षा 150 मिमी० से भी कम होती है और परिणामतः यह एक शुष्क और वनस्पति रहित क्षेत्र हो गया है।
यह माना जाता है कि मेसोजोइक काल में यह क्षेत्र समुद्र का हिस्सा था। इसकी पुष्टि आकल में स्थित काष्ठ जीवाश्म पार्क में उपलब्ध प्रमाणों तथा जैसलमेर के निकट ब्रह्मसर के आसपास के समुद्री निक्षेपों  से होती है।  
यहां की प्रमुख स्थलाकृतियां स्थानांतरी रेतीले टीले , छत्रक चट्टानें और मरूउद्द्यान हैं।
यहां की अधिकतर नदियां अल्पकालिक हैं। मरुस्थल के दक्षिणी भाग में बहने वाली लूनी नदी महत्वपूर्ण है।
अल्पवृष्टि और बहुत अधिक वाष्पीकरण से इस प्रदेश में हमेशा जल की किल्ल्त होती है।  कुछ नदियां तो थोड़ी दूर तय करने के बाद ही मरुस्थल में लुप्त हो जाती हैं।
यह अन्तःस्थलीय अपवाह का उदाहरण हैं जहाँ नदियां झील या प्लाया में मिल जाती हैं।
इन प्लाया झीलों का पानी खारा होता है जिसे नमक बनाया जाता है।


तटीय मैदान

  •   स्थिति और सक्रिय भू - आकृतिक प्रक्रियाओं के आधार पर तटीय मैदानों को २ भागों में बांटा जा सकता है - पश्चिमी तटीय मैदान , और पूर्वी तटीय मैदान 
  • पश्चिमी तटीय मैदान जलमग्न मैदान हैं। मन जाता है की ऐतिहासिक पौराणिक शहर द्वारका किसी समय पश्चिमी तट पर मुख्य भूमि पर स्थित था । 
  • जलमग्न होने के कारण पश्चिमी तटीय मैदान एक संकीर्ण पट्टी मात्र है और पत्तनों एवं बंदरगाहों के विकास के लिए प्राकृतिक परिस्थितियों प्रदान करता है।  यहां पर स्थित बंदरगाहों में कांडला , मजगाँव , जे एल एन नावहा शेवा , मर्मगाओ , मैंगलोर , कोचीन शामिल हैं। 
  • पश्चिमी तटीय मैदान मध्य में संकीर्ण है परन्तु उत्तर और दक्षिण में चौड़े  हो जाते हैं  , इस तटीय मैदान में बहने वाली नदियां डेल्टा नहीं बनाती हैं। 
  • मालाबार तट  की विशेष स्थलाकृति ' कयाल ' , जिसे मछली पकड़ने और अंतः स्थलीय नौकायन के लिए प्रयोग किया जाता है।  यह पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का बिंदु है। 
  • केरल में हर वर्ष प्रसिद्ध " नेहरू ट्रॉफी वलामकाली " नौका दौड़ का आयोजन " पुन्नामदा कयाल में किया जाता है। 
  • पश्चिमी तटीय मैदान की तुलना में पूर्वी तटीय मैदान चौड़ा है और उभरे हुए तट का उदाहरण है। 
  • पूर्व की  तरफ बहने वाली नदियां जो की बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं वे यहां लम्बे - चौड़े डेल्टा बनाती हैं।
  • इसमें महानदी , गोदावरी , कृष्णा और कावेरी का डेल्टा शामिल है।  उभरा तट होने के कारण यहां पत्तन और पोताश्रय कम हैं। 
  • यहां महाद्वीपीय शेल्फ की चौड़ाई 500 किमी है जिसके कारण यहां पत्तन और पोतश्रयों का विकास मुश्किल है । 

भारतीय द्वीप समूह 

  • भारत में 2 प्रमुख द्वीप समूह हैं -    एक बंगाल की खाड़ी में  दूसरा अरब सागर में 
  • बंगाल की खाड़ी में लगभग 572 द्वीप हैं , रीची द्वीप समूह और लबरीन्थ द्वीप यहां के 2 प्रमुख द्वीप हैं। 
  • बंगाल के खाड़ी के द्वीपों को 2 श्रेणियों में बांटा जा सकता है --उत्तर में अंडमान और दक्षिण में निकोबार।  ये समुद्र में जलमग्न पर्वतों का हिस्सा हैं। 
  • कुछ छोटे द्वीपों की उत्पत्ति ज्वालामुखी से भी जुड़ी है।  बैरन द्वीप भारत का एकमात्र जीवंत ज्वालामुखी भी निकोबार द्वीप समूह में स्थित है।  यह असंगठित कंकड़ , पत्थरों और गोलाश्मों से बना है। 
  • इस द्वीप समूह की मुख्य पर्वत चोटी सैंडल पीक (उत्तरी अंडमान -738 मी. ), मॉउंट डियोवॉली (मध्य अंडमान -515 मीटर ), माउंट कोयोब (दक्षिणी अंडमान -460 मीटर )और माउंट थुईल्लर (ग्रेट निकोबार -642 मीटर )हैं। 
  • पश्चिमी तट के साथ कुछ निक्षेप तथा खूबसूरत पुलिन हैं।  यहां स्थित द्वीपों पर संवहनी वर्षा  होती है और भूमध्य रेखीय प्रकार की वनस्पति उगती है। 
  • अरब सागर के द्वीपों में लक्षद्वीप और मिनिकॉय शामिल हैं।  ये केरल तट से 280 किमी से 480  किमी दूर स्थित हैं।  पूरा द्वीप समूह प्रवाल निक्षेप से बना है। यहां पर 36 द्वीप हैं और इनमें से ११ पर मानव आवास हैं। 
  • मिनिकॉय सबसे बड़ा द्वीप है जिसका क्षेत्रफल 453 वर्ग किमी है।  पूरा द्वीप समूह 11 डिग्री चैनल द्वारा 2 भागों में  बाँटा गया है। 
  • उत्तर में अमीनी द्वीप और दक्षिण में कनानोरे द्वीप। 
  • इस द्वीप समूह पर तूफान निर्मित पुलिन हैं जिस पर आबद्ध गुटिकाएं , शिंगिल , गोलाश्म पूर्वी समुद्र तट पर पाए जाते हैं। 

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