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Tuesday, May 29, 2018

The States Re-organization Commission and Regional Councils



                  राज्य पुनर्गठन आयोग 

                        स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से ही भाषायी आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग उठती रही। जिसको देखते हुए जून 1948 में भारत सरकार ने एस.के.धर की अध्यक्षता में भाषायी प्रान्त आयोग की नियुक्ति की , आयोग ने अपनी रिपोर्ट दिसम्बर 1948 में प्रस्तुत कर दी जिसमें सिफारिश की गयी थी की राज्यों का पुनर्गठन भाषा के आधार पर न हो कर बल्कि प्रशासनिक सुविधा के आधार पर किया जाय। इससे अत्यधिक रोष उत्पन्न हुआ तत्पश्चात दिसम्बर 1948 में अन्य भाषायी प्रान्त समिति गठित की गई जिसमें जवाहरलाल नेहरू , वल्लभभाई पटेल , पट्टाभि सीतारमैया थे , इसे JVP समिति कहा गया। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट अप्रैल 1949 में भाषा आधारित राज्य पुनर्गठन का औपचारिक रूप से विरोध किया। 
              1953 में मद्रास से तेलगु भाषी क्षेत्र पृथक की मांग करते हुए पोट्टी श्री रामुल्लू ने आमरण अनशन शुरू कर  दिया जिससे 56 दिनों के बाद 15 दिसम्बर 1952 को उनकी मृत्यु हो गयी इसके फलस्वरूप प्रधानमंत्री नेहरू जी ने तेलगु भाषियों के लिए आन्ध्र प्रदेश के गठन की घोषणा कर दी। आँध्रप्रदेश का गठन 1 अक्टूबर 1953 को किया गया , यह भाषायी आधार पर गठित होने वाला प्रथम राज्य था। 
           आंध्र प्रदेश के निर्माण होने से अन्य क्षेत्रों में भी मांग उठने लगी , जिसके कारण भारत सरकार ने दिसम्बर 1953 में  न्यायमूर्ति फजल अली की अध्यक्षता में 3 सदस्यी राज्य पुनर्गठन आयोग गठित किया जिसके अन्य सदस्य के. एम पणिक्कर तथा ह्रदय नाथ कुंजरू थे। इस आयोग ने ३० दिसंबर 1955 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी जिसमें  स्वीकार किया गया था की राज्यों के पुनर्गठन में भाषा को मुख्य आधार बनाया जाना चाहिए लेकिन एक राज्य एक भाषा को सही नहीं माना उन्होंने भारत की अनेकता में एकता को सर्वोपरि माना।  इस रिपोर्ट के आधार पर राज्य पुनर्गठन अधिनियम-1956  पारित किया गया  , इसके अनुसार संविधान में 7 वां संशोधन किया गया और मूल संविधान के राज्यों के 4 श्रेणी यथा क, ख, ग, घ को समाप्त कर 14 राज्यों और 5 केंद्रशासित प्रदेशों का गठन किया। 

1950 के बाद बनाए गए नवीन राज्य :-

  • 1950 में संयुक्त प्रदेश का नाम बदल कर उत्तर प्रदेश किया गया। 
  • 1953 में मद्रास के कुछ क्षेत्रों को अलग कर के 'आंध्र प्रदेश राज्य अधिनियम 1953 ' द्वारा आंध्र प्रदेश बना। 
  • 1960 में बम्बई को अलग कर के दो राज्य  महाराष्ट्र व गुजरात बने। 
  • 1961 में 10 वें संशोधन से द्वारा दादरा नगर हवेली संघ शासित क्षेत्र बना। 
  • 1961 में पुलिस कार्यवाही करके गोवा , दमन, दीव अधिगृहित कर 12वें  संशोधन से संघ शासित प्रदेश बनाए गए व 1981 में गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल गया। 
  • 1954 में पुडुचेरी (पुडुचेरी , कराईकल , माहे ,यनम) को फ्रांस ने भारत को सौंप दिया जिसे 1962 में 14 वें संशोधन से संघ शासित प्रदेश बना दिया गया। 
  • 1963 में नागा पहाड़ियों व असम के त्वेनसांग क्षेत्र को मिलाकर नागालैंड  16वां राज्य बना , पूर्ण राज्य दर्जा प्राप्त होने से पूर्व यह असम  राज्यपाल के अधीन था। 
  •   1966 में पंजाब से अलग कर 17 वां राज्य हरियाणा व केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ बना। शाह आयोग(1966 )की सिफारिश पर इन दोनों के पहाड़ी क्षेत्र को अलग कर के केंद्र शासित प्रदेश हिमाचल प्रदेश बना। 
  • 1969 में मद्रास का नाम तमिलनाडु किया गया। 
  • 1971 में हिमाचल को पूर्व राज्य दर्जा प्राप्त हुआ जो कि 18 वां राज्य बना। 
  • 1972 के परिवर्तनों से २ केंद्र शासित  प्रदेश मणिपुर व त्रिपुरा एवं उप राज्य मेघालय को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला , इसके अलावा मिजोरम व अरुणाचल संघ शासित प्रदेश बने साथ ही अब कुल 21 राज्य हो गए  -  19 -मणिपुर,  20 - त्रिपुरा , 21 - मेघालय 
  • 22 वें संविधान संशोधन 1969 द्वारा मेघालय को स्वायत्तशासी राज्य बनाया गया था यह असम में उप राज्य के रूप में भी जाना जाता था जिसका अपना मंत्री परिषद था। 
  • 1973 में मैसूर का नाम कर्नाटक हो गया। 
  • 1947 से 1974 तक सिक्किम भारत से अलग शाही शासन में था किन्तु भारत सरकार पर इसके रक्षा , विदेश, संचार का उत्तर दायित्व था ततपश्चात 35 वें संविधान संशोधन अधिनियम 1974 से सिक्किम को संबद्ध राज्य बना लिया गया जिसके लिए अनुच्छेद 2 क व नयी अनुसूची (10 वीं, संबद्धता शर्त व नियम ) को संविधान को जोड़ा गया। अंततः 36 वें संशोधन अधिनियम 1975 से इसे पूर्ण राज्य बनाया गया। यह 22 वां राज्य बना। 
  • 1987 में 3 नए राज्य 23वां- मिजोरम , 24 वां - अरुणाचल प्रदेश , 25 वां - गोवा अस्तित्व में आये। 
  • 2000 में 1 नवंबर को  मध्य प्रदेश से अलग कर छत्तीसगढ़ 26 वां , 9 नवंबर को उत्तर प्रदेश से अलग कर उत्तरांचल  27 वां व  15 नवंबर को बिहार से अलग होकर झारखण्ड  28 वां राज्य बना। 
  •  2006 में उत्तरांचल का नाम उत्तराखंड किया गया।  
  • 02 जून 2014 को आंध्र प्रदेश से अलग कर तेलंगाना। 
संक्षेप में :-

          आंध्र प्रदेश         - 1953 
          गुजरात              -  1960 
         नागालैंड              - 1963 
          हरियाणा             - 1966 
         हिमाचल              -  1971 
    मेघालय, मणिपुर , त्रिपुरा - 1972 
    सिक्किम                 -  1975 
 मिजोरम , अरुणाचल ,गोवा - 1987 
छत्तीसगढ़               -  1 नवंबर 2000 
उत्तराखंड                - 9 नवंबर  2000  
झारखण्ड                - 15 नवंबर 2000 
तेलंगाना                   - 2 जून 2014 


क्षेत्रीय परिषदें 
क्षेत्रीय परिषदों के संबंध में मूल संविधान में कोई प्रावधान नहीं था।  राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 की धारा -15 में इसके लिए प्रावधान किया गया है। वर्तमान में भारत में कुल 5 क्षेत्रीय परिषदें हैं जिनका गठन राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। भारत के गृहमंत्री या राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत केंद्रीय मंत्री, परिषद का अध्यक्ष तथा संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री उपाध्यक्ष होते हैं जो प्रतिवर्ष  बदलते रहते हैं। 
           क्षेत्रीय परिषद        -     मुख्यालय  
 १- उत्तरी क्षेत्रीय परिषद         नई दिल्ली 
२ - मध्य क्षेत्रीय परिषद    -    इलाहाबाद 
३- पूर्वी क्षेत्रीय परिषद       -   कोलकाता 
४-  दक्षिण क्षेत्रीय परिषद   -   चेन्नई 
५ - पश्चिम क्षेत्रीय परिषद    -   मुंबई 

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