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Thursday, May 17, 2018

SCIENCE GIST- NCERT- CLASS 7 PART-2

 


SCIENCE GIST - BASED ON CLASS 7th NCERT Syllabus- Part 2


  • तापमान , आर्द्रता ,वर्षा , वायु वेग आदि मौसम के घटक होते हैं। 
  • दिन का न्यूनतम तापमान भोर में होता है। 
  • उत्तर पूर्व की जलवायु आर्द्र होती है। 
  • लायन टेल्ड लंगूर (दाढ़ी वाला लंगूर ) पश्चिमी घाट के वर्षा वनों में पाया जाता है। 
  • पवन का वेग बढ़ने से वायु दाब कम हो जाता है , पवन सदैव उच्च दाब से निम्न दाब की तरफ जाती है।  वायु दाब में अंतर जितना अधिक होगा , पवन का वेग उतना ही अधिक होता है। 
  • ताप वृद्धि से ऊपर उठती पवन प्रबल हो जाती है , पवन वायु में पहले से विद्यमान जल बूंदों को अपने साथ ऊपर  ले जाती है जहाँ ताप कम होने के कारण वे जम जाती हैं व पुनः नीचे गिरने लगती हैं , गिरते जल की बूंदें  और तीव्र वेग से ऊपर उठते वायु के परस्पर क्रिया से बिजली कौंधती है एवं ध्वनि होती है , इस घटना को तड़ित झंझावात कहा  जाता है। 
  •  चक्रवात का केंद्र एक शांत क्षेत्र होता है , चक्रवात तल से ऊपर 10 -15 किमी पर होता है। चक्रवात केंद्र का व्यास 10 -30 किमी.  होता है इसमें पवन वेग न्यूनतम होता है।  चक्रवात को अमेरिका में हरिकेन व फिलीपींस, जापान में टाइफून कहा जाता है। 
  •   टॉरनेडो गहरे रंग के कीपकार बादल होते हैं। 


  • मृदा की विभिन्न परतों से गुजरती हुई ऊर्ध्वकाट मृदा परिच्छेदिका कहलाती है , ये परतें  संस्तर - स्थितियां कहलाती हैं। 
  • सबसे नीचे आधार शैल ,उसके ऊपर C संस्तर , उसके ऊपर बी संस्तर तत्पश्चात A संस्तर स्थित  है।  
  • शैल कड़ों  व ह्यूमस  मिश्रण मृदा कहलाता है। 
  • बड़े कणों का अनुपात अधिक होता है तो बलुई मृदा , बारीक़ कण अधिक हो तो मृण्मय मृदा व अनुपात सामान हो तो दोमट मृदा होती है। पौधों के लिए दोमट मृदा उपयुक्त है। 
  •  मृदा गुण मुख्यतः जल अंतः स्रवण दर  , नमी ,जल के अवशोषण के आधार पर देखी जाती है। 
  • कोशिका में ऑक्सीजन भोजन के विखंडन में सहायक होता है ,इस प्रक्रम में ऊर्जा मुक्त होती है इसे कोशिकीय श्वसन कहते हैं। 
  • कोशिका में ग्लूकोस ,ऑक्सीजन का उपयोग कर को CO2   व जल में विखंडित हो जाता है , यह वायवीय विखंडन है जब भोजन बिना ऑक्सीजन के विखंडित हो तो अवायवीय श्वसन कहलाता है। 
  • यीस्ट जैसे जीव अवायवीय श्वसन से ऊर्जा प्राप्त करते हैं। 
  • यीस्ट एक कोशिकीय जीव  है , ये अवायवीय श्वसन में एल्कोहल  निर्मित करते हैं। 
  • जब मांशपेशियां अवायवीय श्वसन करती हैं तो ग्लूकोस का आंशिक विखंडन होता है जिसमें लैक्टिक अम्ल व CO2 निकलता है  ,लैक्टिक अम्ल के संचयन से ही मांशपेशियों में ऐंठन होती है। 
  • कॉकरोच वातक या श्वास प्रणाल से श्वसन करते हैं।
  •  केंचुए में श्वास विनिमय उनकी आर्द्र त्वचा से होता है। 
  • ह्रदय व रक्त वाहिनियां संयुक्त रूप से परिसंचरण तंत्र बनाती हैं। 
  • रक्त परिसंचरण की खोज विलियम हार्वे नमक चिकित्सक ने की थी। स्पंज हाइड्रा जैसे जंतुओं में कोई परिसंचरण तंत्र नहीं पाया जाता है।  ये जिस जल में रहते हैं वही उनके शरीर में प्रवेश करके उनके भोजन व ऑक्सीजन की आपूर्ति करता है। 
  • रक्त का तरल भाग प्लाज़्मा कहलाता है , रक्त का लाल रंग आरबीसी के कारण होता है जिसमें हीमोग्लोबिन होता है।  अन्य रक्त कोशिका WBC कहलाता है ,WBC रोगाणु नाशक होता है। 
  • रक्त का थक्का प्लेटलेट्स के कारण बनता है। 
  • धमनी ऑक्सीजन समृद्ध रक्त को  सभी भागों में ले जाती है तथा रक्त प्रवाह तेज व अधिक दाब पर होने से इनकी दीवार मोटी होती है। को शरीर के सभी भागों से वापस ह्रदय में हैं।
  • धमनी आगे चलकर वाहिनियों में विभाजित हो जाती है व ऊतकों में पंहुच कर वे पुनः अत्यधिक पतली नलिकाओं में बंट जाती हैं जो केशिका कहलाती हैं , ये केशिकाएं पुनः मिलकर शिरा बनाती हैं जो रक्त हृदय में ले जाती हैं।  
  • शिराएं ,CO2 समृद्ध रक्त को शरीर के सभी भागों से वापस ह्रदय में ले जाती हैं।
  • वयस्क व्यक्ति सामान्यतः 24 घंटे में 1 से 1.8  ली. मूत्र करता है , मूत्र में 95% जल ,2.5 % यूरिया  और 2.5% अन्य अपशिष्ट होते हैं। 
  • मछली जैसे जंतु अपशिष्ट उत्पादों को अमोनिया के रूप में उत्सर्जित करते हैं।     
  • ऊतक , कोशिकाओं का वह समूह होता है जो जीव में किसी कार्य विशेष को संपादित करता है। 
  • पादपों में जल व पोषक तत्व जाइलम व भोजन फ्लोएम के द्वारा संवाहित होते हैं। 
  • लवण तथा यूरिया जल के साथ पसीने के रूप में शरीर से बाहर निकलता है। 
  • पादपों में मूल , तना  व पत्तियां , पादप के कायिक अंग कहलाते हैं। 
  • अलैंगिक जनन में पादप बिना बीजों के नए पादप उत्पन्न करते हैं व लैंगिक जनन में नए पादप बीजों से प्राप्त होते हैं। कायिक प्रवर्धन अलैंगिक जनन है। 
  • यीस्ट में मुकुलन द्वारा जनन होता है। 
  • मक्का ,पपीता , ककड़ी ,खीरा ,एकलिंगी पुष्प होते हैं , जबकि सरसों , गुलाब , पिटुनिया द्विलिंगी पुष्प होते हैं। 
  • परागकोष में परागकण होते हैं जो न्र युग्मक बनाते हैं , स्त्रीकेसर में वर्तिकाग्र , वर्तिका  व अंडाशय होते हों। अंडाशय में एक या अधिक बीजाण्ड होते हैं। 
  • निषेचन के पश्चात अंडाशय फल में विकसित हो जाता है। 
  • पुष्प पादप का जनन अंग होता है। एक अमावस्या से दूसरी अमावस्या का समय माह कहा जाता है।
  • 1 माइक्रोसेकण्ड = सेकंड का १० लाख वां भाग 
  • 1 नैनो सेकंड = सेकंड का अरबवां भाग। 
  • जब किसी तार से विद्युत् धारा प्रवाहित होती है तो वह तप्त हो जाता है, इसे विद्युत् धारा का तापीय  प्रभाव कहा जाता है। तार में उतपन्न ऊष्मा का परिमाण उस तार के पदार्थ , लम्बाई , व मोटाई पर निर्भर होता है। 
  • जब किसी तार से विद्युत् धारा प्रवाहित होती है तो वह चुंबक की तरह व्यवहार करता है , यही विद्युत् धारा का चुंबकीय प्रभाव कहा जाता हैं। 


                                                                                              क्रमशः******* 

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