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Saturday, May 26, 2018

PREAMBLE OF INDIAN CONSTITUTION

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संविधान की उद्देशिका :-
   संविधान की प्रस्तावना में भारतवासियों की तरफ से घोषणा की गई है की भारत को प्रभुता संपन्न , लोकतंत्रीय गणराज्य बनाने का संकल्प करते हुए संविधान सभा एक ऐसे संविधान को अंगीकृत ,अधिनियमित और आत्मार्पित कर रही थी जिसके अग्रलिखित उद्देश्य द्रृष्टिगोचर होते हैं -

सम्पूर्ण प्रभुत्व संपन्न :- भारत  आंतरिक व विदेशी मामलों में किसी के अधीन नहीं हैं।  वह पूर्णतः एक स्वतंत्र राष्ट्र है। 
धर्मनिरपेक्षतावादी राज्य :-  भारत का कोई राष्ट्रीय धर्म नहीं है।  प्रत्येक व्यक्ति विशेष को अपनी पसंद के अनुसार धर्म चुनने की स्वतंत्रता है। 
जनता की संप्रभुता  :- सत्ता का स्रोत जनता है। इसी के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि शासन करते हैं और ये प्रतिनिधि जनता के प्रति उत्तरदायी होते हैं। 
न्याय की स्थापना :- राज्य सभी को उचित न्याय उपलब्ध कराएगा चाहे वह सामाजिक हो , आर्थिक हो या राजनीतिक हो। 
स्वतंत्रता :- राज्य में विचार ,अभिव्यक्ति , विश्वास , धर्म एवं उपासना की स्वतंत्रता होगी। 
भारत एक गणराज्य  :-  भारत में राज्य का अध्यक्ष निर्वाचित राष्ट्रपति होगा। 
स्वतंत्रता ,समानता व बंधुत्व , एकता और अखण्डता :- देश की एकता व अखण्डता  को बनाए रखना राज्य व जनता का प्रथम दायित्व होगा। 


प्रस्तावना
                     
                         " हम भारत के लोग  , भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्वसम्पन्न , समाजवादी  , पंथनिरपेक्ष , लोकतंत्रात्मक ,गणराज्य बनाने के लिए ,तथा उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक ,आर्थिक और राजनैतिक न्याय, विचार ,अभिव्यक्ति , विश्वास  , धर्म  और उपासना की स्वतंत्रता , प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए , तथा  उन सब  में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए  दृढ़ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख २६ नवंबर  १९४९ ई. (मिति मार्गशीर्ष  शुक्ल सप्तमी ,संवत दो हजार छह  विक्रमी ) एतद  द्वारा इस संविधान को अंगीकृत , अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं। "



                         प्रस्तावना में अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संशोधन किया जा सकता है। 1973 में केशवानन्द भारती के वाद में इस विषय पर निर्णय देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा की "प्रस्तावना संविधान का अंग है। इसके मूल तत्वों को क्षति पहुंचाए बगैर इसमें संशोधन किया जा सकता है। प्रस्तावना में अब तक एक ही बार संशोधन (1976 में 42वें संशोधन में ) किया गया है। उस समय  'पंथनिरपेक्ष ','समाजवादी 'और 'अखंडता' शब्दों को जोड़ा गया।  

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