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Friday, May 25, 2018

PHYSICAL FEATURES OF INDIA

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                             भौतिक -भारत 
  • भारतीय स्थल पिंड -गोंडवाना लैंड का भाग है। 
  • गोंडवाना लैंड में - द० अमरीका , अफ्रीका ,ऑस्ट्रेलिया , अंटार्कटिका ,भारत थे। 
  • संवहनीय धाराओं ने भू -पर्पटी को अनेक टुकड़ों में विभाजित कर दिया और इस प्रकार भारत -ऑस्ट्रेलिया की प्लेट गोंडवाना भूमि से अलग होने के बाद उत्तर दिशा में प्रवाहित होने लगी।  
  • उत्तर दिशा की तरफ परवाह के परिणाम स्वरुप यह प्लेट अपने से अधिक विशाल प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकराई। 
  • इस टकराव के कारण इन दोनों प्लेटों के बीच स्थित 'टेथिस ' भू -अभिनति के अवसादी चट्टान वलित होकर हिमालय तथा पश्चिम एशिया की पर्वतीय श्रृंखला के रूप में विकसित हुए। 
  • गोंडवाना भूमि प्राचीन विशाल महाद्वीप  पैंजिया का दक्षिणतम भाग है जिसके उत्तर में अंगारा भूमि  है। 
  • "टेथिस " के हिमालय के रूप में ऊपर उठने तथा प्रायद्वीप पठार के उत्तरी किनारे नीचे धंसने के परिणामस्वरूप एक बहुत बड़ी द्रोणी का निर्माण हुआ। समय के साथ यह बेसिन उत्तर के पर्वतों एवं दक्षिण के प्रायद्वीपीय पठारों  से बहने वाली नदियों के अवसादी निक्षेपों द्वारा धीरे धीरे भर गया। 
  • इस प्रकार जलोढ़ निक्षेपों से निर्मित एक विस्तृत समतल भू -भाग भारत के उत्तरी मैदान के रूप में  विकसित हुआ। 

     भारत के मुख्यतः 4 प्राकृतिक प्रदेश हैं :-
  1. उत्तर का पर्वतीय क्षेत्र 
  2. उत्तर का विशाल मैदान 
  3. प्रायद्वीपीय पठार 
  4. तट एवं द्वीप 
    उप -भौतिक भू-आकृतिक प्रदेश :-
  1. उत्तरी पर्वत 
  2. सिंधु गंगा मैदान 
  3. थार मरुस्थल 
  4. दक्कन पठार 
  5. पूर्वी तट 
  6. पश्चिमी तट 
  7. अपतटीय सागर एवं द्वीप  
मेघालय का पठार , प्रायद्वीपीय पठार का ही भाग है। 
भारत के पश्चिमी समुद्र तट का निर्माण भूमि के उत्थान एवं निर्गमन से हुआ है। 
भारत में गोंडवाना शैलों में कोयले के बृहत्तम भंडार हैं। 
हिमालय वलित पर्वत का उदाहरण है। 
दक्कन पठार की उत्पत्ति - क्रिटेशियस काल के अंतिम चरणों में 
पश्चिमी घाट पर्वत  उत्पत्ति  - सेनोजोइक (नूतन ) काल में 
अरावली पर्वत की उत्पत्ति  - प्री कैम्ब्रियन युग 
नर्मदा - ताप्ती जलोढ़       - अत्यंत नूतन काल 
केरल का कुट्टानाड भारत का न्यूनतम ऊंचाई क्षेत्र है। यह समुद्र  तल से नीचे है और इसे धान का कटोरा कहा जाता है। 
कुट्टुनाड की खेती को "वैश्विक महत्वपूर्ण कृषि विरासत प्रणाली" घोषित किया गया है 

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