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Tuesday, May 15, 2018

HISTORY PART -6- MAHAAJANPAD


 

                       जनपद और साम्राज्य 
  • ईसा पूर्व छठी सदी से पूर्वी उत्तर प्रदेश व पश्चिम बिहार में लोहे का व्यापक प्रयोग होने लगा  था। 
  • बुद्ध के समय में 16  बड़े राज्य थे जो महाजनपद  कहलाते थे , जिसमे से अधिकतर राज्य विंध्य के उत्तर में थे और पश्चिमोत्तर सीमा प्रान्त से बिहार तक फैले थे। 
  • इनमे मगध , कोसल , वत्स  और अवन्ति ये चार शायद  अधिक शक्तिशाली थे।  
  • मगध - यह दक्षिण बिहार में अवस्थित था , इसकी राजधानी राजगृह थी।  बृहद्रथ  जरासंध यहां के प्रमुख शासक थे शतपथ ब्राह्मण में इसे कीकट कहा गया है। 
  • मगध में आधुनिक पटना और गया जिला और शाहाबाद का कुछ हिस्सा पड़ता था।
  •  अंग -पूर्व से शुरू करने पर पहले अंग पड़ता था जिसमें आधुनिक मुंगेर व भागलपुर है।   इसकी राजधानी चंपा थी।  
  • अंग राज्य को कालांतर में मगध ने अपने में मिला लिया था।  
  • वज्जि गंगा के उत्तर में आज के तिरहुत में वज्जियों का राज्य  था।  यह आठ जनों  का संघ था  जिनमें  सबसे प्रबल लिच्छवि थे 
  • इनकी राजधानी वैशाली में थी जिसकी पहचान आज के वैशाली जिले के बसाढ़ नमक गांव से की गयी है।
  • काशी -वज्जि के पश्चिम में काशी राज्य था जिसकी राजधानी वाराणसी थी।  बाद में काशी ने कोसल के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। 
  • कोसल - कोसल जनपद में पूर्वी उत्तर प्रदेश पड़ता था , इसकी राजधानी श्रावस्ती थी जिसकी पहचान उत्तर प्रदेश के गोंडा बहराइच जिले की सीमा पर  सहेत - महेत से की गयी है। 
  • कोसल में महत्वपूर्ण नगरी अयोध्या भी थी। 
  • कोसल में शाक्यों का कपिलवस्तु गणराज्य भी शामिल था ,  राजधानी की पहचान  बस्ती जिले के पिपरहवा  नामक स्थान से की गयी है। 
  • शाक्यों की दूसरी राजधानी पिपरहवा से दूर लुम्बिनी  नामक  स्थान पर थी। 
  • मल्ल - कोसल के पड़ोस में मल्ल गणराज्य था जिसकी सीमा वज्जि राज्य के उत्तरी सीमा से जुडी थी। 
  • मल्ल की राजधानी कुशीनारा में थी , जिसकी पहचान देवरिया जिले किए कसिया नामक स्थान से की गयी है। 
  •  वत्स - पश्चिम की तरफ यमुना तट पर वत्स जनपद था ,इसकी राजधानी इलाहाबाद के समीप कौशाम्बी में थी। 
  • वत्स लोग वही कुरूजन थे जो हस्तिनापुर छोड़  कर कौशाम्बी आ कर बस गए थे। 
  • अवन्ति - यह राज्य मध्य मालवा और मध्य प्रदेश के  सीमावर्ती क्षेत्र में फैला था। इस राज्य के  दो भाग थे , उत्तर भाग की राजधानी उज्जैन थी और दक्षिण भाग की राजधानी माहिष्मती थी। 
  • कालांतर में उज्जैन ने माहिष्मती को पछाड़ दिया। 
  • अश्मक- यह  दक्षिण भारत का एकमात्र महाजनपद था , नर्मदा और गोदावरी नदियों के बीच इस प्रदेश की राजधानी पाटन थी। इस राज्य के राजा इक्ष्वाकु वंश के थे।  इसका निरंतर अवन्ति के साथ संघर्ष चलता रहा और बाद में यह अवन्ति के अधीन हो गया। 
  • कम्बोज - यह गांधार -कश्मीर के उत्तर आधुनिक पामीर के  पठार  क्षेत्र के पश्चिम बदख्शां -प्रदेश  कम्बोज महाजनपद कहलाता था , हाटक या राजपुर इसकी राजधानी थी। 
  • कुरु -  इसकी पहचान आधुनिक हरियाणा और दिल्ली के यमुना नदी के पश्चिम वाले भाग के रूप में की गयी है। इसकी राजधानी इंद्रप्रस्थ (आधुनिक दिल्ली ) थी। 
  • गांधार - इसमें आधुनिक पाकिस्तान का पश्चिमी तथा अफगानिस्तान का पूर्वी क्षेत्र और कुछ कश्मीर का                भाग था। इसकी राजधानी तक्षशिला थी। 
  • चेदि - इसकी पहचान वर्तमान में बुंदेलखंड के रूप में की गयी है , इसकी राजधानी शक्तिमती थी। महाभारत में वर्णित शिशुपाल यहीं का राजा था। 
  • पांचाल - इसकी पहचान आधुनिक पश्चिमी  उत्तर प्रदेश के रूप में की गयी  है। पांचाल की दो शाखाएँ थी - उत्तरी और दक्षिणी।  उत्तरी पांचाल की राजधानी अहिक्षत्र और दक्षिण पांचाल की राजधानी काम्पिल्य थी। चुलानी ब्रह्मदत्त पांचाल का महान  शासक था। 
  • मत्स्य - इसमें आधुनिक राजस्थान के अलवर , भरतपुर , तथा जयपुर जिले शामिल थे। 
  • शूरसेन - इसकी पहचान आधुनिक मथुरा के पास की गयी है।  इसकी राजधानी मथुरा थी। 

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