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Wednesday, September 12, 2018

GUPTA EMPIRE




  • मौर्य सम्राज्य के विघटन के बाद भारत में दो बड़ी राजनैतिक शक्तियां उभर कर आई सातवाहन और कुषाण। 
  • सातवाहनों ने दक्षिण में स्थायित्व प्रदान किया और कुषाणों ने उत्तर में प्रगति पूरक कार्य किया। 
  • कुषाण सम्राज्य के खंडहर पर नए साम्राज्य "गुप्त साम्राज्य " का प्रादुर्भाव हुआ जिसने कुषाणों के साथ साथ सातवाहनों के क्षेत्र पर भी अपना अधिपत्य कायम किया। 
  • गुप्त साम्राज्य मौर्य जितना बड़ा तो नहीं था फिर भी इसने 335 ई. से 455ई. तक उत्तर भारत पर एक छत्र राज्य किया। 
  • ईसा की तीसरी सदी के अंत में गुप्त वंश का आरंभिक राज्य उत्तर प्रदेश और बिहार में था। गुप्तकालीन अवशेषों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि उपलब्धियों की दृष्टि से उत्तर प्रदेश उस समय सबसे समृद्ध स्थान था। 
  • गुप्त साम्राज्य के सिक्कों पर अंकित घुड़सवार दर्शाते हैं कि उस समय घुड़सवारों की भूमिका प्रमुख रही होगी। 
  • अनुकूल व्यापारिक परिस्थितियों के बल पर गुप्त शासकों ने अपना आधिपत्य  मध्य गंगा मैदान , प्रयाग , साकेत और मगध पर स्थापित कर लिया। 
  • समय बीतने के साथ साथ गुप्त साम्राज्य ने अपना अधिकार संपूर्ण भारत पर काबिज कर लिया। 
गुप्त साम्राज्य के प्रसिद्ध शासक

चन्द्रगुप्त प्रथम (319 - 334 ई.) :- गुप्त वंश का पहला प्रसिद्ध शासक चन्द्रगुप्त प्रथम हुए। उसने एक लिच्छवी राजकुमारी से विवाह किया जो कि संभवतः नेपाल की थीं। चन्द्रगुप्त प्रथम एक महान शासक हुआ क्यूंकि उसने 319-20  ई. में अपने राजगद्दी पर बैठने के स्मारक में गुप्त संवत चलाया। 

समुद्रगुप्त  (335 - 380 ई.) :- चन्द्रगुप्त प्रथम के पुत्र और उत्तराधिकारी समुद्रगुप्त ने गुप्त साम्राज्य का अत्यधिक विस्तार किया। वह अशोक के विपरीत हिंसा और विजय में आनंद पाता था। हरिषेण उसका दरबारी कवि था। हरिषेण ने एक अभिलेख लिखा जिसमें उल्लेखित किया कि समुद्रगुप्त ने किन किन शासकों को पराजित किया , यह अभिलेख प्रयाग में हैं और उसी स्तंभ पर है जिसपर शांतिकामी अशोक के अभिलेख हैं। समुद्रगुप्त  ने अपने साम्राज्य विस्तार के क्रम में गंगा - दोआब क्षेत्र , पूर्वी हिमालय राज्यों , नेपाल , असम ,बंगाल, पंजाब , विंध्य क्षेत्र , पूर्वी दक्कन तक को येन केन प्रकारेण हराकर सत्ता स्थापित कर ली। समुद्रगुप्त की आकांक्षाएँ बढ़ते बढ़ते तमिलनाडु के कांची तक पंहुचीं जहां पल्लवों पर अधिकार जमाया। समुद्रगुप्त को अपनी वीरता और युद्ध कुशलता के लिए "भारत का नेपोलियन " कहा जाता है। 

चन्द्रगुप्त द्वितीय  (380  - 412 ई.) :- चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासन काल में गुप्त साम्राज्य अपने उत्कर्ष की चोटी पर पहुंचा। उसने विवाह व विजय दोनों के माध्यम से साम्राज्य की सीमा बढ़ाई। चन्द्रगुप्त ने अपनी कन्या प्रभावती का विवाह वाकाटक के राजा से कराया , जो ब्राह्मण जाति का था और मध्य भारत में शासन करता था। उसके मरने के बाद उसका नाबालिग पुत्र उत्तराधिकारी बना इस तरह चन्द्रगुप्त ने अपनी शक्ति को मध्य भारत से मालवा तक विस्तृत कर लिया और उसे पश्चिमी समुद्र तट मिल गया जिससे उसका व्यापार और भी आसान हो गया। इस तरह मालवा और उसका मुख्य नगर उज्जैन और भी समृद्ध हो गए , संभवतः चन्द्रगुप्त द्वितीय ने उज्जैन को अपनी दूसरी राजधानी बनाया था। 
  चंद्रगुप्त ने विक्रमादित्य की उपाधि धारण की थी।  यह उपाधि इससे पूर्व 57 ई.पू. में उज्जैन के शासक ने भी पश्चिमी भारत में शक क्षत्रपों पर विजय पाने के उपलक्ष्य में धारण की थी। चन्द्रगुप्त द्वितीय का उज्जैन स्थित दरबार  कालिदास और अमर सिंह जैसे बड़े बड़े विद्वानों से विभूषित था।  चन्द्रगुप्त द्वितीय के समय में ही चीनी यात्री फाह्यान भारत आया था। 



गुप्त साम्राज्य का पतन

चन्द्रगुप्त द्वितीय के उत्तराधिकारियों को ईसा की पांचवी सदी के उत्तरार्ध में मध्य एशिया के हूणों के आक्रमण का सामना करना पड़ा , शुरू में तो गुप्त सम्राट स्कंदगुप्त ने हूणों को भारत में आगे बढ़ने से रोकने के लिए बहुत कोशिश की लेकिन उसके उत्तराधिकारी कमजोर हुए और हूणों के सामने टिक नहीं पाए। 485 ई. में आकर हूणों ने पूर्वी मालवा और मध्य भारत के हिस्से को अपने कब्जे में ले लिया यहां उनके अभिलेख पाए गए हैं, फलस्वरूप छठी सदी के आरंभ में गुप्त साम्राज्य बहुत छोटा हो गया। मालवा नरेश ने गुप्त शासकों की सत्ता को भी चुनौती दे दी और सारे उत्तर भारत में अपना प्रभुत्व स्थापित किया जिसके उपलक्ष्य में 532 ईसवी में विजय स्तंभ खड़े किये 
    गुप्त राज्य की विशाल वेतनभोगी सेना के खर्च में कमी होने लगी क्योंकि धार्मिक या अन्य वजह से ग्रामदान की परिपाटी जोर पकड़ती जा रही थी , जिससे आमदनी कम होती चली गयी। धीरे- धीरे गुप्त साम्राज्य स्वर्णमुद्राओं में भी मिलावट करने लगा और शासन छठी सदी के बीच तक किसी न किसी तरह चलता रहा लेकिन महिमा लगभग 100 साल पहले ही समाप्त हो चुकी थी। 

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