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Saturday, September 1, 2018

गंगा नदी : अपवाह तंत्र


गंगा नदी : अपवाह तंत्र

     गंगा नदी का उद्गम उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में माना दर्रे के निकट स्थित गोमुख हिमनद से होता है। यहां इसे भागीरथी कहा जाता है। देवप्रयाग में भागीरथी अलकनंदा से मिल जाती है , अलकनंदा का स्रोत सतोपंथ हिमनद  है जो बद्रीनाथ के उत्तर में तथा नीति दर्रे के निकट स्थित है।  यह हरिद्वार के निकट मैदानी भाग में प्रवेश करती है। गंगा नदी भागीरथी और अलकनंदा नदी का सम्मिलित रूप है जो देवप्रयाग के पास मिलकर गंगा बन जाती हैं। 
  • इसमें दाहिने तरफ से इलाहाबाद में यमुना नदी  मिलती है। 
  • दक्षिणी पठार से इसमें सोन नदी मिलती है। 
  • आगे बढ़ने पर दामोदर नदी छोटा नागपुर पठार से बहती हुई आ कर मिलती है। 
  • टोंस नदी भी दाहिने तरफ से आकर मिलती है। 
  • गंगा नदी के बाएं तरफ से  वाली मुख्य नदियां , पश्चिम से पूर्व की तरफ - रामगंगा , गोमती , घाघरा , गंडक , कोसी ,बूढी गंडक , बागमती , महानंदा। 
  • गंगा नदी की सबसे ज्यादा लंबाई उत्तर प्रदेश में है। 
  • राज महल पहाड़ियों के नजदीक प.बंगाल के मालदा जिले के फरक्का बैराज (बांध ) के बाद गंगा नदी दक्षिण पूर्व में मुड़ जाती है। इसके बाद यह  भागों में बंट जाती है , भागीरथी -हुगली तथा पद्मा। 
  • हुगली कोलकाता से गुजरती है और पद्मा,  बांग्लादेश में प्रवेश करती है।  
  • ब्रह्मपुत्र नदी पद्मा से मिलकर आगे बढ़ती है और फिर इसमें मेघना नदी मिल जाती है , यही मेघना नाम से ही यह बंगाल की खाड़ी में गिरती है। 
  • "गंगा -ब्रह्मपुत्र " डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा क्षेत्र है , इसका विस्तार हुगली और मेघना नदियों के बीच है। 
  • सुंदर वृक्ष की अधिकता के कारण ही यह क्षेत्र "सुंदर वन डेल्टा " कहलाता है। 



गंगा की सहायक नदियां 

रामगंगा :-     यह गढ़वाल की पहाड़ियों से निकलती है। यह उत्तरप्रदेश में नजीबाबाद के पास मैदानी भाग में प्रवेश करती है। कन्नौज के पास यह गंगा में मिल जाती है। 

शारदा (सरयू ) :-     यह नेपाल हिमालय के मिलाम हिमानी से निकलती है , शुरू में इसे गौरी-गंगा कहा जाता है। भारत नेपाल सीमा पर यह कोली कही जाती है।  उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में यह घाघरा से मिल जाती है। यहां इसे चौक कहा जाता है। 

गंडक  :-      गंडक नदी , धौलागिरि व एवरेस्ट पर्वत के बीच के नेपाल हिमालय से उद्गमित होती है। बिहार के चंपारण जिले में यह गंगा नदी के मैदान में प्रवेश करती है और पटना के निकट सोनपुर में यह गंगा से मिल जाती है। 

कोसी  :-  यह गंगा की सबसे बड़ी सहायक नदी है। यह एक पूर्ववर्ती नदी है।  इसकी मुख्यधारा अरुण नदी जो कि एवरेस्ट पर्वत के उत्तर में तिब्बत से निकलती है।  प्रायः मार्ग बदलने के कारण इसे " बिहार का शोक " कहा जाता है। 

महानंदा  :-  यह नदी दार्जिलिंग की पहाड़ियों से उद्गमित हो कर गंगा में मिल जाती है। भारत में यह गंगा नदी के बायें तट की अंतिम सहायक नदी है। 

केन  :-  इसका पौराणिक नाम कर्णवती है , यह मध्य प्रदेश के कैमूर पहाड़ियों से निकलती है।  उत्तरप्रदेश के बाँदा के निकट यह यमुना से मिल जाती है। इस नदी के तट पर चित्रकूट स्थित है। 

सोन नदी :-  यह अमरकंटक की पहाड़ियों में  नर्मदा के उद्गम स्थान के निकट से निकलती है। यह गंगा के दाएं तरफ से मिलने वाली प्रमुख सहायक नदीयों में से एक है। इसके रेत में सोने के कण पाए जाते हैं इसीलिए इसे स्वर्ण नदी कहा जाता है। 

दामोदर  नदी :-  दामोदर नदी पश्चिम बंगाल तथा झारखंड में बहने वाली एक प्रसिद्ध नदी है। यह झारखंड के छोटा नागपुर पठार क्षेत्र से निकलती है और पश्चिम बंगाल पंहुचती है। आगे चलकर यह हुगली नदी से मिलती है तत्पश्चात बंगाल की खाड़ी में गिरती है। अचानक बाढ़ आने के कारण इसे " बंगाल का अभिशाप " भी कहा जाता था। भारत के प्रमुख कोयला व अभ्रक क्षेत्र इसी घाटी में हैं। 

यमुना  नदी :-  यह गंगा की प्रमुख सहायक नदी है। यह टिहरी -गढ़वाल जिले के यमुनोत्री हिमनद से निकलती है। हिमालय में उत्तर की तरफ से मसूरी श्रेणी के पीछे  इसमें टोंस नदी मिलती है। यह हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश के बीच एक सीमा बनाते हुए आगे बढ़ती है और दिल्ली , मथुरा , आगरा से होकर गुजरती है।  इसमें मालवा पठार से बहती हुई चंबल , सिंध , बेतवा तथा केन नदियां आ कर मिलती हैं। 

चंबल  नदी :-   यह नदी मध्य प्रदेश के मालवा पठार क्षेत्र के महू स्थान से निकलती है। यह पहले उत्तर दिशा में राजस्थान के कोटा तक बहती है फिर बूंदी , सवाई माधोपुर और धौलपुर होते हुए यमुना से आकर मिल जाती है। यह अपनी उत्खात (बीहड़ ) जमीन के लिए प्रसिद्ध है। यह राजस्थान की एक मात्र सदानीरा नदी है। बनास , पार्वती , काली -सिंध , व क्षिप्रा नदी इसकी सहायक नदियां हैं। 

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