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Wednesday, September 12, 2018

BRAHMAPUTRA RIVER SYSTEM




  •  ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र विश्व के सबसे लम्बी नदियों में से एक प्रमुख नदी तंत्र है। 
  • यह जल विसर्जन के कुल आयतन की दृष्टि से विश्व के ४ बड़े नदियों में शामिल है। 
  • इसका अपवाह तंत्र तीन देशों तिब्बत , भारत , बांग्लादेश में विस्तृत है। 
  • यह भारत में 1346 किमी बहती है। 
  • यह कैलाश श्रेणी के दक्षिण मानसरोवर झील के पास महान हिमनद (आंग्सी ग्लेसियर )से निकलती है। 
  • इसका बेसिन मानसरोवर झील से मरियन ला दर्रे द्वारा अलग होता है। 
  • ब्रह्मपुत्र का तिब्बत क्षेत्र  में नाम सांग्पो (यारलुंग) है। इस क्षेत्र में समुद्र तल से 4000 मीटर की ऊंचाई पर भी नावें चलती हैं जो कि विश्व के विश्व के सबसे प्रसिद्ध नावमार्गों में से एक है। 
  • नामचा बरवा पर्वत के पूर्वी किनारे से यह एक तीखे मोड़ के साथ दक्षिण पश्चिम में मुड़ती है और 5500 मीटर गहरा कैनियन बनाती है। 
  • अरुणाचल प्रदेश में यह दिहांग कहलाती है। 
  • पासीघाट के निकट सदिया के पास दो सहायक नदियां दिबांग और लोहित के मिल जाने के बाद इसका नाम ब्रह्मपुत्र पड़ता है। 
  • इसके पश्चात यह असम घाटी में प्रवेश करती है , यहां कई सहायक नदियाँ ब्रह्मपुत्र से मिलती हैं। इनमें सुबानसिरी , जिया भरेली , धनश्री , पुथीमारी , पगलादिया और मानस प्रमुख है। 
  • असम  घाटी में ब्रह्मपुत्र नदी गुंफित जलमार्ग बनाती है जिसमें कुछ बड़े नदी द्वीप भी मिलते हैं। 
  • इनमें विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली  भी शामिल है।  यह द्वीप संकटग्रस्त स्थिति में है तथा इसे संरक्षित करने व विश्व विरासत में शामिल करने के प्रयास किये जा रहे हैं। 
  • यहां ब्रह्मपुत्र नदी धुबरी शहर तक पश्चिम  की तरफ बहती है व उसके बाद गारो पहाड़ी से मुड़कर दक्षिण की तरफ बहते हुए गोलपारा के समीप बांग्लादेश में प्रवेश करती है। 
  • बांग्लादेश में इसका  हो जाता है। 
  • बांग्लादेश में तीस्ता आदि नदियां मिलकर अंत में पद्मा (गंगा ) में मिल जाती हैं। 
  • मेघना की मुख्य धारा बराक नदी का उद्भव मणिपुर की पहाड़ी से होता है , इसकी मुख्य सहायक नदियां माक़ू , तरंग , तुईवई , जिरी ,सोनाइ ,रुकनी , धलेश्वरी , जटिंगा आदि हैं। 
  • बराक नदी , बांग्लादेश में तब तक बहती है जब तक भैरव बाजार के निकट गंगा - ब्रह्मपुत्र नदी में इसका विलय नहीं हो जाता। 
ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियां
तीस्ता :- यह ब्रह्मपुत्र की सबसे पश्चिमी दाहिने तट की नदी है।  कंचनजंगा  से निकलते हुए यह दार्जिलिंग के पहाड़ियों में एक तीव्र पर्वतीय प्रवाह है , जिसमें रांगपो ,रंगित  तथा सेबक नदियां आकर मिलती हैं। इसके तट पर जलपाईगुड़ी शहर स्थित है। 

रंगित :- यह सिक्किम से उद्गमित होती है।  इसमें बड़ी संख्या में क्षिप्तिकाएं हैं। यह नदी पूरे विश्व में जल क्रीड़ा (रॉफ्टिंग ) के लिए प्रसिद्ध है। 

मानस  :- यह एक पूर्ववर्ती नदी है।  तिब्बत से निकलकर यह वृहत हिमालय में एक महाखड्ड का निर्माण करते हुए प्रवेश करती है। 

सुबनसिरी :- यह ब्रह्मपुत्र की एक बड़ी सहायक नदी है। हिमालय क्षेत्र में इस नदी का मार्ग लम्बा है। यह मिरि पहाड़ियों तथा अबोर पहाड़ियों को विभाजित करती है। 

बराक  :- यह नदी नागालैंड में माउंट जापोवा से निकलती है , मणिपुर में दक्षिण की तरफ बहती है तथा एक कैंची मोड़ लेती है। इसकी अनेक सहायक नदियां जो मिजोरम के उत्तरी भाग को अपवाहित करती हैं , एकजुट होकर सिलचर तथा काछार जिले से होकर गुजरती है। बराक बेसिन में  मासिनराम तथा  चेरापूंजी  है जहाँ विश्व में सबसे अधिक वर्षा होती है। 

मणिपुर नदी  :- यह नदी मणिपुर के उत्तरी भाग से निकलती है तथा दक्षिण की तरफ बहती है।  इम्फाल से गुजरते हुए यह नदी लोकटक झील को अपवाहित करती है तथा चिंदविन घाटी में जाकर मिलती है जो म्यांमार में इरावदी की सहायक नदी है। 

BY-         
A.K.

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