PSC GS ATOM

A Complete free Guidance to get a PSC white collar job.We provides Study Materials , important points based on exam syllabus. Which we think our readers shoud not miss. For any PSC exams, we provide NCERT Based notes, study material, Current Affairs, Daily News, History, Geography,Polity,Economy,Science notes, Model Papers and all other study material which is important for UPPCS, SSC, UPSC, MPPSC, BPSC, RPSC, RO/ARO and other state Exam.

Breaking

Friday, August 24, 2018

अपवाह तंत्र- सिंधु नदी तंत्र




       उत्पत्ति के आधार पर भारत की नदियों का वर्गीकरण मुख्यरूप से दो वर्गों में किया गया है -


  • हिमालय की नदियां 
  • प्रायद्वीपीय नदियां 
हिमालय की नदियां 
  • हिमालय की उत्पत्ति के पूर्व तिब्बत के मानसरोवर झील के पास निकलने वाली सिंधु , सतलज ,ब्रह्मपुत्र नदियां टेथिस सागर में गिरतीं थी। 
  • हिमालय की नदियां पूर्ववर्ती नदियों के उदाहरण हैं। इनके द्वारा गार्ज का निर्माण हुआ है। 
  • ये नदियां अभी भी युवावस्था में हैं और निरंतर अपरदन कार्य कर रही हैं। 
  •  चूँकि वर्षा जल के अलावा अतिरिक्त हिम पिघलने से भी इन्हें जल की आपूर्ति होती है , अतः ये सदानीरा हैं। 
  • मैदानी भागों में ढाल की न्यूनता के कारण ये विसर्पों का निर्माण करती हैं एवं प्रायः अपना मार्ग बदलती रहती हैं। 
  • हिमालय की नदियों को तीन प्रमुख नदी - तंत्रों में विभाजित किया गया है। 
    •  सिंधु नदी तंत्र 
    • गंगा नदी तंत्र 
    • ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र 
  • इन तीनों नदी तंत्रों का विकास एक अत्यंत विशाल नदी से हुआ है , जिसे शिवालिक या हिन्द ब्रह्म नदी कहा जाता था। यह नदी असम से पंजाब तक बहती थी। 



  • सिंधु नदी तंत्र : -
    •  इसके अंतर्गत सिंधु एवं सहायक नदियां जैसे झेलम , चिनाव , रावी, व्यास , सतलज (पंचनद ) सम्मिलित हैं। 
    • सिंधु तिब्बत के मानसरोवर झील के निकट "चेमायुंगडुंग " ग्लेशियर से निकलती है। 
    • यह ब्रह्मपुत्र से ठीक उलटी तरफ बहती है। 
    • भारत में इसकी लंबाई 1,114 किमी है तथ इसका संग्रहण क्षेत्र 11.65 लाख वर्ग किमी (भारत 3.21 लाख वर्ग किमी ) है।  
    • भारत पाकिस्तान के बीच 1960 ई. में हुए "सिंधु जल समझौते " के अंतर्गत भारत सिंधु व उसकी सहायक नदियों में झेलम और चिनाव के केवल 20% जल का ही उपयोग  कर सकता है, जबकि सतलज और रावी के 80 % जल का उपयोग अधिकार भारत के पास है ।  
    • सिंधु नदी के बांयी तरफ से मिलने वाली नदियों में पंचनद की ही पांच नदियां हैं। ये पांचो नदियां संयुक्त रूप से सिंधु नदी की मुख्यधारा से "मीठनकोट " के पास मिलती हैं। 
    • जास्कर , श्यांग ,शिगार , व गिलगित बांयी और से मिलने वाली अन्य प्रमुख नदियां हैं। 
    • दायीं ओर से मिलने वाली प्रमुख नदियां श्योक , काबुल , कुर्रम आदि हैं। 
    • काबुल व उसकी सहायक नदियां सिंधु में अटक के पास मिलती हैं। सिंधु नदी अटक में ही मैदानी भाग में प्रवेश करती है। 
    • दक्षिण - पश्चिम की ओर बहते हुए करांची के पूर्व में अरब सागर में गिरती है। 
    • झेलम नदी :- 
      •  यह पीरपंजाल पर्वत की पद स्थली में स्थित वेरीनाग झरने से निकलकर 212 किमी उत्तर -पश्चिम दिशा में बहती हुई वुलर झील में मिलती है। 
      • श्रीनगर इसी नदी के किनारे बसा है। यहां इस पर शिकारे चलाए जाते हैं। 
      • झेलम और रावी पाकिस्तान में झग के निकट चिनाब नदी से मिल जाते हैं। 
      • इसकी सहायक नदी किशनगंगा है , जिसे पाकिस्तान में नीलम कहा जाता है। 
    • चिनाब : -
      • इसका  प्राचीन नाम अस्किनी  था।  
      •  यह सिंधु की विशालतम सहायक नदी है , जो हिमाचल प्रदेश में चंद्रभागा कहलाती है।  
      • यह लाहुल में बड़लाचा दर्रे के दोनों ओर से चंद्र और भागा नामक दो नदियों के रूप में निकलती हैं। यही दोनों मिलकर चिनाब नदी बनती हैं। 
      • ये हिमाच्छादित पर्वतों से निकलती हैं अतः ये सदानीरा हैं। 
      • एकजुट होने के बाद चेनाब पीर- पंजाल तथा वृहत हिमालय के बीच बहती है। 
      • भारत में इसकी लम्बाई 180 किमी और अपवाह क्षेत्रफल 26,755 वर्ग किमी है। 
    •  रावी (परुष्णी  या  इरावती ) :- 
      •  यह पंचनदियों में सबसे छोटी नदी है। 
      • इसका उद्गम स्थल कांगड़ा जिले के रोहतांग दर्रे के समीप है। इसी के निकट व्यासकुंड से व्यास नदी निकलती है। 
      • इसकी घाटी को कुल्लू घाटी कहते हैं। 
      • यह पीर पंजाल के पश्चिमी ढाल को तथा धौलाधार श्रेणी के उत्तरी ढाल को अपवाहित करती है। 
      • पंजाब के मैदान में यह भारत पाक सीमा के साथ बहती है , गुरुदासपुर तथा अमृतसर जिले के साथ साथ बहने के बाद पाकिस्तान में प्रवेश करती है।  
      • पकिस्तान में सराय सिंधु के निकट यह चेनाब से मिलती है। 
    • व्यास (विपाशा ) : -
      •  इसका उद्गम कुल्लू पहाड़ी में रोहतांग दर्रे के दक्षिणी किनारे के निकट व्यास कुंड से होता है। 
      • यह धौलाधर श्रेणी को काटती है तथा कोटी एवं लार्जी के पास गहरा खड्ड बनाती है। 
      • यह सतलज की सहायक नदी है। कपूरथला के निकट "हरिके " नामक स्थान पर यह सिंधु से मिल जाती है। 
    • सतलज (शतुद्री ) : -
      •  यह मानसरोवर झील के समीप स्थित राकस ताल से निकलती है तथा शिपकिला दर्रे के पास भारत में प्रवेश करती है।
      • यह एक पूर्ववर्ती नदी है जिसे तिब्बत में लांगचेन खंभाब कहते हैं। 
      • यह जास्कर तथा वृहत हिमालय श्रेणी में महाखड्ड बनाती है।  
      • स्फीति नदी इसकी मुख्य सहायक नदी है। 
      • यह एक मात्र पूर्ववर्ती नदी है , जो हिमालय के तीन भागों को काटती है। 
      • भाखड़ा - नांगल बांध सतलज नदी पर ही बनाया गया है। 
      • भाखड़ा बांध के नीचे रोपड़ में यह नदी पंजाब के मैदानी भाग में प्रवेश करती है। 
      • भारत तिब्बत मार्ग , सतलज घाटी से होकर गुजरता है। 

No comments:

Post a Comment

Recent Post

GUPTA EMPIRE

मौर्य सम्राज्य के विघटन के बाद भारत में दो बड़ी राजनैतिक शक्तियां उभर कर आई सातवाहन और कुषाण।  सातवाहनों ने दक्षिण में स्थायित्व प्रद...