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Friday, August 24, 2018

संगम काल



तीन आरंभिक राज्य 
  • भारतीय प्रायद्वीप का दक्षिणी छोर , जो कृष्णा नदी के दक्षिण में पड़ता है , तीन राज्यों में बंटा हुआ था -
    •  चोल 
    • पाण्ड्य  
    • चेर या केरल  




पांड्य 
  • पांड्यों का उल्लेख सबसे पहले मेगस्थनीज ने किया था। मेगस्थनीज ने इनके राज्य को मोतियों के लिए प्रसिद्ध बताया था। 
  • पाण्ड्य राज्य भारतीय प्रायद्वीप के दक्षिण और दक्षिण पूर्वी भाग में था जिसमें मुख्य रूप से तमिलनाडु के तिन्नवेल्ली , रामनद और मदुरै शामिल थे। जबकि राजधानी मदुरै में थी। 
  • मेगस्थनीज ने पांड्य समाज को मातृसत्तात्मक कहा था , उसने ये भी कहा कि पांड्य राज्य का शासन स्त्री के हाथ में था। 
  • संगम साहित्य से पता चलता है कि यह राज्य धनाढ्य और समृद्ध था। 
  • पांड्य राजाओं ने रोमन सम्राट ऑगस्टस के दरबार में अपने राजदूत भेजे थे वे उनसे व्यापार भी करते थे। 
  • इस राज्य में ब्राह्मणों को उच्च स्थान प्राप्त था। 

चोल
  • चोल राज्य मध्य काल के शुरुआत में चोलमण्डलं (कोरोमंडल ) कहलाता था। 
  • यह पेन्नार और वेलार नदियों के मध्य पांड्य राज्य के लगभग  पूर्व- उत्तर में था। 
  • इनका वर्णन संगम साहित्य में भी मिलता है। 
  • इनके राजनीतिक  सत्ता का केंद्र उरैयूर था जो उस समय सूती कपड़े के व्यापार के लिए मशहूर था। 
  • चोलों का स्थायी इतिहास ईसा के दूसरी सदी में चोल राजा कारैकाल से शुरू होता है। 
  • उसने पुहार की स्थापना की और कावेरी नदी के किनारे लगभग 160 किमी लंबा बांध बनवाया था। 
  • पुहार की पहचान आधुनिक कावेरीपट्ट्नम से की गई है जो कि चोलों की राजधानी थी। 
  • चोल शासन काल में कावेरीपट्ट्नम व्यापार का बड़ा केंद्र था और इसका गोदीबाड़ा (डॉक ) विशाल था। 
  • चोलों का मुख्य व्यापार सूती कपड़ों का था , उनके पास एक कुशल नौसेना थी। 
  • कारैकाल के बाद धीरे धीरे सत्ता का ह्रास होता गया , चेरों और पांड्यों ने चोलों के राज्य को ध्वस्त कर दिया बची खुची सत्ता को उत्तर से पल्लवों ने नष्ट कर दिया। 
चेर
  • चेर राज्य पांड्य क्षेत्र के पश्चिम और उत्तर में फैला था। इस क्षेत्र में आधुनिक केरल और तमिलनाडु के कुछ भाग थे। 
  • चेर राज्य व चोलों और पांड्यों के बीच निरंतर युद्ध चलता रहता था , परन्तु बाद में चेर और चोल मित्र बन गए और आपस में वैवाहिक संबंध स्थापित किये। 
  • लेकिन कुछ समय बाद चेरों ने पांड्यों से मित्रता , और संधि कर चोलों के खिलाफ लड़ाई शुरू कर दी परन्तु चोलों ने दोनों को हरा दिया। 
  • कहा यह भी जाता है कि एक चेर राजा ने पीठ में घाव लगने के कारण लज्जित होकर आत्महत्या कर ली थी। 
दक्षिणी राज्यों की राज्य स्थिति -
  • ये मसाले विशेषकर काली गोल मिर्च उपजाते थे जिनकी विदेशों में बड़ी मांग थी। 
  • ये हाथी दांत का व्यापार भी करते थे। 
  • ये रत्न और खासकर मोतियों का निर्यात व्यापार भी करते थे। 
  • उरैयूर अपने सूती कपडे के व्यापार के लिए जाना जाता था। 
  • सेना अध्यक्षों को अनुष्ठान के बाद एनाडि की उपाधि दी जाती थी। 
  • शासक वर्ग को अरसर कहा जाता था। 
  • राज्यों में वर्ग और वर्ण ,जाति आधार पर सामजिक विषमता विद्यमान थी। 
  • पहाड़ी प्रदेशों के मुख्य स्थानीय देवता मुरुगन थे जो आरंभिक मध्य काल में सुब्रह्मण्यम कहे जाते थे। 
संगम साहित्य -
  • वर्तमान में दक्षिण भारत के इतिहास का जो कुछ भी पता चल पाता है उसका आधार संगम साहित्य ही है।
  • संगम तमिल कवियों का सम्मेलन था जो कि संभवतः किसी तत्कालीन राजा के आश्रय में आयोजित हुआ था। 
  • इन सम्मेलनों द्वारा रचित  संगम साहित्य लगभग 300 ई. से 600ई. के बीच संकलित किये गए थे। 
  • संगम मुख्य रूप से 2 भागों में बांटा जा सकता है -
    • आख्यानात्मक ग्रंथ मेलकड़क्कु - इनमें 18 मुख्य ग्रंथ हैं 
    • उपदेशात्मक ग्रंथ कीलकड़क्कु - 18 लघु ग्रंथ 
  • संगम ग्रंथों के अतिरिक्त एक और मुख्य ग्रंथ तोलकाप्पियम है जो कि व्याकरण और अलंकार का ग्रंथ है।
  • तमिल साहित्य के 2 प्रमुख महाकाव्य सिलप्पदिकाराम और मड़िमेखलै हैं। 

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