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Saturday, June 2, 2018

CITIZENSHIP & OCI


citizenship according to constitution of india

भाग  २ 
अनु. 5   से  अनु. 11   

अनुच्छेद 5  -      संविधान के आरम्भ पर नागरिकता। 
अनुच्छेद 6 -      पाकिस्तान से भारत को प्रवजन करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार। 
अनुच्छेद 7 -   पाकिस्तान को प्रवजन करने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार। 
अनुच्छेद 8 -     भारत से बाहर रहने वाले भारतीय उद्भव के कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार। 
अनुच्छेद 9 -      विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से अर्जित करने वाले व्यक्तियों का नागरिक न रह जाना। 
अनुच्छेद 10 -      नागरिकता के अधिकारों का बना रहना। 
अनुच्छेद 11 -  संसद द्वारा नागरिकता के अधिकार का विधि द्वारा  विनियमन किया जाना। 

महत्त्वपूर्ण तथ्य :-
  • भारत में ब्रिटेन की तरह एकल नागरिकता का प्रावधान है। 
  • नागरिकता के  संबंध में विधि बनाने की शक्ति संसद को प्राप्त है। जिसके तहत संसद द्वारा भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 पारित किया गया। 
  • इस अधिनियम में वर्ष 1986 , 1992 , 2003 , 2005  और 2015 में संशोधन किया गया। 
  • वर्तमान भारतीय नागरिकता अधिनियम के अनुसार भारतीय नागरिकता निम्नलिखित 5 प्रकार से प्राप्त की जा सकती है ---
              १-  जन्म से :-   कोई व्यक्ति जिसका जन्म 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद भारत में हुआ हो वह भारत का नागरिक होगा। जन्म के समय उसके माता या पिता में से किसी एक का भारत का नागरिक होना अब आवश्यक है। 
               २- वंश परंपरा से  :-- भारत के बाहर किसी अन्य देश में 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद जन्म लेने वाला व्यक्ति भारत का नागरिक हो सकता है , यदि उसके जन्म के समय उसके माता या पिता में से कोई भी भारत का नागरिक हो। माता की नागरिकता के आधार पर विदेश में जन्मे व्यक्ति को नागरिकता का प्रावधान नागरिकता संशोधन अधिनियम 1992 द्वारा किया गया है। 

               ३ - पंजीकरण से :- कोई भी व्यक्ति पंजीकरण से नागरिकता ग्रहण कर सकता है जबकि --
                  ** पंजीकरण आवेदन तिथि से 5 वर्ष पूर्व से भारत में निवास करने वाला व्यक्ति। 
                  ** जिनका जन्म भारत में हुआ किन्तु भारत से बाहर किसी अन्य देश में निवेश कर रहा हो। 
                    ** विदेशी महिला जो किसी भारतीय से विवाह कर चुकी है या करने वाली है। 
                      ** भारतीय नागरिक के अवयस्क बच्चे। 
                   ** राष्ट्रमंडल देशों के ऐसे नागरिक जो भारत में रहते हैं या भारत सरकार की नौकरी करते हैं। 

               ४ - देशीयकरण से :- कोई विदेशी व्यक्ति जो वयस्क है और १० वर्ष से भारत में निवास कर रहा हो , वह भारत सरकार से देशीयकरण का प्रमाणपत्र प्राप्त कर भारत का नागरिक बन सकता है। 

               ५ - भूमि के अर्जन द्वारा :- यदि भारत सरकार द्वारा किसी नए भू-भाग को अर्जित कर भारत में उसका विलय किया जाता है तो उस क्षेत्र में निवास करने वाले व्यक्तियों को स्वतः भारत की नागरिकता प्राप्त हो जाती है। 


नागरिकता का अंत 

किसी भारतीय नागरिक की नागरिकता का अंत तीन तरह से हो सकता है यदि - 
  1. किसी अन्य देश की नागरिकता ग्रहण कर लेता है -
  2. नागरिकता का परित्याग करने पर 
  3. सरकार द्वारा नागरिकता से वंचित करने पर  

भारत सरकार निम्न में से  किसी भी आधार पर व्यक्ति की नागरिकता ख़त्म कर सकती है -

  1. संविधान के प्रति अनिष्ठा दिखने पर 
  2. युद्धकाल में शत्रु की सहायता करने पर 
  3. गलत तरीके से नागरिकता प्राप्त करने पर 
  4. पंजीकरण या देशीकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के 5 वर्ष के भीतर किसी अन्य देश द्वारा कम स कम २ वर्ष की सजा पाने पर। 
  5. किसी भारतीय स्त्री द्वारा विदेशी पुरुष से विवाह करने पर 
  6. लगातार 7 वर्ष तक भारत से बाहर रहने पर 

OCI (दोहरी नागरिकता ) :-

   यह दिसम्बर २००३ में लक्ष्मीमल सिधवी समिति की सिफारिश पर नागरिकता संशोधन विधेयक -2003 संसद द्वारा पारित किया गया। इसके द्वारा विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों को सीमित रूप में भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है। इसे ओवरसीज़ सिटीजनशिप ऑफ़ इंडिया नाम दिया गया है, जिसे सामान्यतः दोहरी नागरिकता कहा जाता है।  इसके अंतर्गत ब्रिटेन , स्विट्ज़रलैंड , पुर्तगाल , फ्रांस सहित कुल 16 देशों में बसे प्रवासी भारतीयों को ओवरसीज़ नागरिकता (PIOs Card ) प्रदान करने का प्रावधान है। 
       **   इन्हें बिना पासपोर्ट भारत आने जाने की स्वतंत्रता होती है , किन्तु मताधिकार नहीं प्राप्त होता है। 
       **  इन्हें कोई संवैधानिक पद प्राप्त करने का अधिकार नहीं होगा। 
        ** अनुच्छेद १६ में वर्णित अवसर की समानता का अधिकार इन्हें नहीं प्राप्त होगा। 

28 जून 2005 को नागरिकता (संशोधन ) अध्यादेश ,2005  की उद्घोषणा की गई। इसके द्वारा प्रावधान किया गया कि कोई भी प्रवासी भारतीय जो किसी ऐसे देश में रह रहा हो जहां दोहरी नागरिकता का प्रावधान है , सीमापारीय भारतीय नागरिकता (O.C.I.) प्राप्त कर सकता है।  इसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश को छोड़कर अन्य सभी देशों में रहने वाले भारतीय मूल के नागरिक ओवरसीज नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं। 

इस तरह वर्तमान में केंद्र सरकार भारतीय मूल  व्यक्तियों एवं उनके परिवारों को २ तरह की योजनाएं उपलब्ध कराती है --

  1.  भारतीय मूल के व्यक्तियों का कार्ड - PIO : Persons of Indian Origin 
  2. विदेशी भारतीय नागरिक का कार्ड - OCI 


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