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Wednesday, May 16, 2018

SCIENCE GIST - NCERT -CLASS 7th-1



SCIENCE GIST - NCERT   -  CLASS 7th

  • जंतु एवं अधिकतर जीव पादपों द्वारा संश्लेषित भोजन ग्रहण  इन्हें विषमपोषी कहा जाता है। 
  • सजीवों का शरीर सूक्ष्म इकाइयों से बना होता है जो कोशिका कहलाता है ,इसके केंद्र को केन्द्रक  कहा जाता है। केन्द्रक चारो तरफ से जेली जैसे पदार्थ से घिरा होता है जिसे कोशिका द्रव्य  जाता है। 
  • सभी जीवों के लिए सूर्य ऊर्जा का उच्च  स्रोत होता है। 
  • स्टार्च भी एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट है। 
  • शैवाल भी प्रकाश संश्लेषण कर अपना भोजन बनाते हैं। 
  • कार्बोहाइड्रेट - कार्बन , हाइड्रोजन व ऑक्सीजन का बना होता है। 
  •  "प्रोटीन " नाइट्रोजनी पदार्थ है जिनमें कार्बन , ऑक्सीजन ,हाइड्रोजन ,नाइट्रोजन होता  है। 
  • मिटटी के कुछ जीवाणु , गैसीय नाइट्रोजन को यौगिकों में परिवर्तित कर मृदा में निर्मुक्त कर देते हैं। 
  • अमरबेल में क्लोरोफिल नहीं होता है , ये  जिस पेड़ पर आश्रित होते हैं वह परपोषी व अमरबेल परजीवी कहलाता है। 
  • लाइकेन में शैवाल व कवक होते हैं , शैवाल क्लोरोफिल देता है जबकि कवक शैवाल को आवास ,जल व पोषक तत्व उपलब्ध कराता है बदले में शैवाल प्रकाश संश्लेषण करता है। 
  • कुछ जीवाणु जो राइजोबियम कहलाते हैं ,वायुमंडलीय नाइट्रोजन को विलय पदार्थों में परिवर्तित कर देते हैं। राइजोबियम स्वयं भोजन नहीं बना सकते। 
  • मनुष्य के मुख में 6 चवर्णक ,4  अग्र चवर्णक , 2 रदनक ,4 कृन्तक के जोड़े होते हैं। 
  • आमाशय आहार नाल का सबसे चौड़ा भाग है यह एक तरफ ग्रसिका व दूसरी तरफ छुद्रांत में खुलता है। 
  • आमाशय का आंतरिक स्तर एचसीएल अम्ल तथा पाचक रास स्रावित करता है , पाचक रस प्रोटीन को सरल पदार्थों में विघटित करता है। 
  • क्षुद्रांत लगभग 7.5 मी. लम्बी होती है , यह यकृत व अग्नाशय से स्त्रावण  प्राप्त करती है। 
  • यकृत उदर के ऊपरी भाग में दाहिनी ओर होता है। यह शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि होती है। यह पित्त रस स्रावित करती है जो पित्ताशय में संग्रहित होता है। 
  • अग्नाशय , आमाशय के ठीक नीचे होता है। 
  • पचा भोजन अवशोषित होकर छोटी आंत के भित्ति में स्थित ृधुत वाहिकाओं में चला जाता है , इसे अवशोषण कहते हैं।  अवशोषित पदारत रुधिर वाहिकाओं द्वारा शरीर के भागों तक जाता है जहाँ उनका उपयोग जटिल पदार्थों को बनाने में किया जाता है , इस प्रक्रम को स्वांगीकरण कहा जाता है। 
  • कोशिकाओं में उपस्थित  ग्लूकोस  का विघटन ऑक्सीजन की सहायता से कार्बन डाई ऑक्साइड व जल में हो जाता है , व ऊर्जा मुक्त होती है। 
  • बड़ी आंत लगभग 1.5 मी. लंबी होती है ,यह जल व कुछ लवणों का अवशोषण करती है। 
  • घास में सेलुलोस की प्रचुरता होती है जो एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट है। 
  • पोषण क्रम - अंतर्ग्रहण - पाचन -अवशोषण -स्वांगीकरण -निष्काशन 
  • मंड जैसे कार्बोहाइड्रेट का पाचन मुख में ही प्रारम्भ हो जाता है ,प्रोटीन का पाचन आमाशय में होता है। 
  • घास खाने वाले जंतु रोमंथी (रूमिनैंट ) कहलाते हैं। 
  • अंगोरा बकरी जम्मू कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाती है। 
  • रेशम कीट पालन सेरीकल्चर कहलाता है। 
  • फारेनहाइट का परिसर 94 -108 होता है। 
  • डॉक्टरी थर्मामीटर से हम 35ं C से 42ं C तक ही माप सकते हैं।
  • प्रयोगशाला तापमापी का प्रसार सामान्यतः 10ं C से 110ं C होता है। 
  • ठोस में उष्मा का चालन होता है , द्रव में संवहन होता है , वायु में भी संवहन होता है। 
  • सूर्य से पृथ्वी तक उष्मा , विकिरण द्वारा आती है। 
  • अम्लीय पदार्थ -
           सिरका - एसीटिक एसिड               चींटी का डंक  -  फार्मिक एसिड 
           पालक - ऑक्जेलिक एसिड             आँवला  -        एस्कार्बिक एसिड 
          नींबू ,संतरा आदि - साइट्रिक एसिड      ,      इमली ,अंगूर ,कच्चे आम -- टार्टरिक एसिड 
  • लिटमस पेपर लाइकेन से प्राप्त किया जाता है यह अम्ल में लाल व क्षार में नीला हो जाता है। 
  • अम्ल वर्षा में कार्बनिक अम्ल , सल्फ्युरिक अम्ल व नाइट्रिक अम्ल होता है। 
  • आमाशय में hcl  होता है , अपाचन या अति अम्ल से बचने के लिए MgOH (मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड ) लिया जाता है। 
  • चींटी डंक को नमीयुक्त खाने का सोडा या कैलेमाइन विलयन मलकर उदासीन किया जाता है जिसमें जिंक कार्बोनेट होता है। 
  • अत्यधिक उर्वरक मृदा को अम्लीय बना देते हैं। 
  • नीला थोथा कॉपर सल्फेट को कहा जाता है। 
  • लोहे पर क्रोमियम या जिंक जैसी धातु की परत चढ़ाने को यशद लेपन कहा जाता है। 
  • लवण युक्त जल , जंग लगने की प्रक्रम दर को बढ़ा देते हैं। 
  • स्टेनलेस स्टील - लोहा , क्रोमियम ,निकल , मैंगनीज से मिलाकर बनता है जिससे जंग नहीं लगती। 
शेष भाग 2 में क्रमश*******

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