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Tuesday, May 22, 2018

Salient Features of the Indian Constitution



संविधान की प्रमुख विशेषताएं :-
                      भारतीय संविधान में निहित तत्त्व निश्चित रूप से अद्वितीय हैं। सन 1949 में अपने गए संविधान के अनेक वास्तविक लक्षणों में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। विशेषतः 7 वें ,42 वें , 44 वें , 73 वें और 74 वें संशोधन में।  संविधान में कई बड़े परिवर्तन करने वाले 42 वे संविधान संशोधन में अधिनियम ,1976 को मिनी कॉन्स्टिट्युशन कहा जाता है। 

संविधान के वर्तमान रूप में इसमें निम्नलिखित विशेषताएं हैं :-
सबसे लम्बा लिखित संविधान :-  संविधान 2  प्रकार के होते हैं लिखित जैसे अमेरिका , भारत का संविधान  और अलिखित जैसे ब्रिटेन का संविधान।  भारत का संविधान विश्व  का सबसे बड़ा लिखित संविधान है। मूल रूप से (1949 ) संविधान में एक प्रस्तावना ,395  अनुच्छेद (22 भागों में विभक्त ) और 8 अनुसूचियाँ थीं। सन 1951 से हुए कई संशोधनों ने करीब 22 अनुच्छेद व 1 भाग हटा दिया और इसमें करीब 95 अनुच्छेद व 4 अनुसूचियाँ (9 ,10 ,11 ,12 ) को जोड़ा गया। विश्व के किसी संविधान में इतने अनुच्छेद और अनुसूचियाँ नहीं हैं।

विभिन्न स्त्रोतों से विहित  :-  भारत के संविधान ने अपने अधिकतर उपबंध विश्व के कई देशों के संविधानों और भारत शासन अधिनियम 1935 के उपबंधों से लिए  है। संविधान का अधिकतर ढांचागत हिस्सा भारत शासन अधिनियम ,1935 से लिया गया है। संविधान का मौलिक अधिकार अमेरिका से  एवं राज्य के नीतिनिदेशक तत्त्व आयरलैंड से लिए गए हैं। भारतीय संविधान के संघीय सरकार  का सिद्धांत और कार्यपालिका और विधायिका के सम्बन्ध का अधिकांश हिस्सा ब्रिटेन के संविधान से लिया गया है। संविधान के अन्य प्रावधान कनाडा ,ऑस्ट्रेलिया , जर्मनी , जापान आदि देशों से  हैं। 
नम्यता एवं अनम्यता का सामंजस्य  :- कठोर या अनम्य संविधान उसे  माना जाता है जिसमे संशोधन के लिए विशेष प्रक्रिया की जरूरत पड़े अर्थात जिसे आसानी से बदला न जा सके जैसे अमेरिका का संविधान जबकि नम्य संविधान वह संविधान होता है जिसमें संशोधन प्रक्रिया वही हो जो आम कानून निर्माण की जैसे कि ब्रिटेन का संविधान।
               भारत का संविधान कठोर एवं लचीले का मिश्रित रूप है। अनुच्छेद 368 में दो तरह के संशोधन का प्रावधान किया गया है -कुछ उपबंधों को संसद के विशेष बहुमत से संशोधित किया जा सकता है जबकि कुछ अन्य प्रावधानों को संसद के विशेष बहुमत और कुल राज्य के आधे से अधिक राज्यों के अनुमोदन से ही संशोधित किया जा सकता है।
सरकार का संसदीय तंत्र  :- भारतीय संविधान ने अमेरिका की अध्यक्षीय प्रणाली के स्थान पर ब्रिटेन के संसदीय तंत्र को अपनाया है। भारतीय संसदीय प्रणाली की निम्नलिखित  विशेषताएं हैं -

  1. वास्तविक और नाममात्र के कार्यपालकों की उपस्थिति 
  2.  बहुमत वाले दल  की सत्ता 
  3. विधायिका के समक्ष कार्यपालिका की संयुक्त जवाबदेही 
  4. विधायिका में मंत्रियों की सदस्यता 
  5. प्रधानमन्त्री या मुख्यमंत्री का नेतृत्व 
  6. निचले सदन का विघटन 
संसदीय संप्रभुता के साथ न्यायिक सर्वोच्चता का समन्वय  :- संसद की संप्रभुता का उद्देश्य ब्रिटिश संसद से जुड़ा है , जबकि न्यायपालिका की सर्वोच्चता का सिद्धांत अमेरिका के सर्वोच्च न्यायलय से लिया गया है। भारत में एक ओर जहाँ सर्वोच्च न्यायालय अपनी न्यायिक समीक्षा की शक्तियों के तहत संसदीय कानूनों को असंवैधानिक घोषित कर सकता है , वहीं दूसरी तरफ संसद अपनी संवैधानिक शक्तियों के बल पर संविधान के बड़े भाग को संशोधित कर सकती है। 
मौलिक अधिकार  :- मौलिक अधिकार का उद्देश्य वस्तुतः राजनीतिक लोकतंत्र की भावना को प्रोत्साहन देना है, यह कार्यपालिका और विधायिका के मनमाने कानूनों पर निरोधक की तरह काम करते हैं। उल्लंघन की स्थिति में इन्हें न्यायालय द्वारा लागू किया जा सकता है। संविधान के तीसरे भाग में 6 मौलिक अधिकारों का उल्लेख किया गया है। ये अधिकार हैं - समानता का अधिकार , स्वतंत्रता का अधिकार , शोषण के विरूद्ध अधिकार , धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार , सांस्कृतिक व शिक्षा का अधिकार , संवैधानिक उपचारों का अधिकार। सर्वोच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए बंदी प्रत्यक्षीकरण ,परमादेश , प्रतिषेध , अधिकार पृच्छा  , व  उत्प्रेषण जैसे अभिलेख रिट जारी कर  सकता है। अनुच्छेद 20 -21 द्वारा प्राप्त अधिकारों को छोड़कर राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान इन्हें स्थगित किया जा सकता है। 

एकल नागरिकता  :- यद्यपि भारतीय संविधान फेडरल है और दो लक्षणों (एकल और संघीय ) का प्रतिनिधित्व करता है मगर इसमें केवल एकल नागरिकता का प्रावधान है केवल भारतीय नागरिकता। अमेरिका जैसे देशों में राष्ट्र के साथ साथ व्यक्ति जिस राज्य में रहता है उसे वहां की भी नागरिकता प्राप्त होती है जबकि भारत में सभी नागरिक चाहे वे किसी भी राज्य में पैदा हों या रहते हों उनमे कोई भेदभाव नहीं किया जाता है सबको एकल नागरिकता अर्थात भारतीय नागरिकता प्राप्त होती है। 


आपात कालीन प्रावधान  :- आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए संविधान में राष्ट्रपति के लिए बृहद आपातकालीन प्रावधानों की व्यवस्था की गई है। आपातकाल में देश की पूरी सत्ता केंद्र सरकार के हाथों में आ जाती है और राज्य केंद्र के नियंत्रण में चले जाते हैं। संविधान में ३ प्रकार के आपातकाल की स्थिति की विवेचना की गई है :-
  1. राष्ट्रीय आपातकाल :-युद्ध ,आक्रमण ,सशस्त्र विद्रोह द्वारा पैदा हुई राष्ट्रीय अशांति की अवस्था 
  2. राज्य में आपातकाल (राष्ट्रपति शासन ):- राज्यों में संवैधानिक तंत्र विफल हो जाने पर या केंद्र के निर्देशों का अनुपालन करने में असफलता की स्थिति 
  3. वित्तीय आपातकाल :- भारत की वित्तीय स्थिरता या प्रत्यय संकट में हो। 


अन्य महत्वपूर्ण विशेषताएँ  :-

  1.  संविधान में राज्यों हेतु नीति निदेशक सिद्धांत को अंगीकार किया गया है जिसका कार्य सामाजिक व आर्थिक लोकतंत्र को बढ़ावा देना  है एवं भारत में एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना करना है। 
  2. संविधान के 4A भाग में मौलिक कर्तव्य का उल्लेख किया गया है जिसके तहत प्रत्येक भारतीय का कर्तव्य होगा कि वह संविधान ,राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान का आदर करे , राष्ट्र की संप्रभुता , एकता और अखंडता की रक्षा करे , हमारी मिश्रित संस्कृति की समृद्ध धरोहर का अनुरक्षण करे, सभी लोगों में आपसी भाईचारे की भावना का विकास करें इत्यादि। 
  3. भारत का संविधान धर्मनिरपेक्ष है, इसलिए यह किसी धर्म विशेष को भारत के धर्म के तौर पर मान्यता नहीं देता है। संविधान के प्रस्तावना में भी 1976 के 42 वें संशोधन द्वारा 'धर्मनिरपेक्ष ' शब्द जोड़ा गया था।    

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