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Wednesday, May 30, 2018

Nipah Virus Infection

ehat is nipah


आखिर क्या है निपाह/निफा वायरस (NIV )  ?

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार निपाह वायरस से एक उभरती हुई संक्रामक बीमारी है जो मनुष्य और जानवर दोनों में गंभीर बीमारी का कारण बन  रही है। यह वायरस 1998 में पहली बार मलेशिया और सिंगापुर में पाया गया था। उस समय यह मुख्यतः सूअरों में पाया जाता था और उसी के माध्यम से मनुष्यों में फैलता था। उस समय निपाह वायरस से लगभग 250 लोग संक्रमित हुए थे। इस बीमारी की शुरुआत मलेशिया के निपाह कस्बे से हुई अतः इसे निपाह नाम दे दिया गया। 

                  विश्व स्वस्थ्य संगठन के अनुसार , निपाह वायरस प्राकृतिक रूप से चमगादड़ की प्रजाति टेरोपस जीनस से फैलता है।  इस वायरस को विश्व स्वस्थ्य संगठन के स्थलीय पशु स्वास्थ्य संहिता में लिस्टेड किया गया है।  यह वायरस संक्रमित चमगादड़ , सूअर या इंसानो के संपर्क में आने से फैलता है। कुछ वर्ष पहले भारत और बांग्लादेश में यह देखा गया था कि  जिन लोगों को ये रोग हुआ था उन्होंने चमगादड़ से संक्रमित ताड़ी का सेवन किया था।
                  केरल में निपाह वायरस फैलने से पुरे देश में हड़कंप मच गया है , अभी तक वहां 11 लोग मर चुके हैं। केरल के कोझिकोड में लोग अपने  घरों से पलायन कर रहे  हैं

causes of nipah

निपाह वायरस फैलने के कारण :-

                          यह वायरस मूलतः चमगादड़ से फैलता है उसके मूत्र, लार और तरल पदार्थों में यह वायरस होता है। जहां तक पता चल पाया है की इस वायरस की पहली घटना तब हुई जब मलेशिया के खेतों में वनों की कटाई के कारण अपना आवास खोये हुए  सूअर , चमगादड़ के सम्पर्क में आये।  उन्हीं संक्रमित सूअरों से यह मलेशिया फिर सिंगापुर के लोगों में फैला था।
                      भारत में निपाह वायरस चमगादड़ो द्वारा पेड़ के फलों को संक्रमित  करने से  फैला है। भारत में निपाह के मरीजों की जाँच ELISA  TEST द्वारा NATIONAL INSTITUTE of Virology , पुणे में की जाती है।

symptoms of nipah

निपाह वायरस के लक्षण :-
                                निपाह वायरस के लक्षण 4  से 14 दिनों के बीच दिखाई देते हैं, कभी कभी 40 दिन भी लग जाते हैं। निपाह वायरस श्वसन और तंत्रिका दोनों को प्रभावित करता है।  
                 -मांशपेशियों में दर्द
                -अचानक बुखार आना
                -सर दर्द
                -उल्टी आना
                -साँस लेने में तकलीफ
                -गंभीर मामलों में , दौरे और इंसेफ्लाइटिस होने  का खतरा रहता है , ऐसा होने पर 24 से 48 घंटों में कोमा की स्थिति भी आ सकती है।

treatment of nipah

निपाह संक्रमण के रोकथाम के उपाय :-
                अभी इस संक्रमण पर शोध चल रहा है अतः कोई टीका या दवा उपलब्ध नहीं हो पायी है अतः इससे बचाव और संक्रमण फैलने से रोकना ही बेहतर उपाय है।
                चमगादड़ व सूअर  इस रोग का मुख्य कारण  हैं  अतः जितना हो सके चमगादड़ व सूअर के सम्पर्क में आने से बचना चाहिए।
                 चमगादड़  वाले इलाके और संक्रमित फल आदि खाने से बचना चाहिए। वर्तमान में निपाह के सबसे ज्यादा मामले केरल से आ रहे हैं अतः वह से आने फलों नारियल, खजूर आदि को न खायें  , कट के निशान लगे हुए फल एकदम नहीं खाना चाहिए।
               ताड़ी के सेवन से बचें। 
               खुले कंटेनर में बने शराब के सेवन से बचना चाहिए।
               सूअर से भी दूर रहना  चाहिए जहां तक हो रिहायशी इलाकों से  सूअर हटा देने चाहिए।
              उच्च स्तर के मास्क पहनें।
             


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