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Wednesday, September 12, 2018

September 12, 2018

GUPTA EMPIRE




  • मौर्य सम्राज्य के विघटन के बाद भारत में दो बड़ी राजनैतिक शक्तियां उभर कर आई सातवाहन और कुषाण। 
  • सातवाहनों ने दक्षिण में स्थायित्व प्रदान किया और कुषाणों ने उत्तर में प्रगति पूरक कार्य किया। 
  • कुषाण सम्राज्य के खंडहर पर नए साम्राज्य "गुप्त साम्राज्य " का प्रादुर्भाव हुआ जिसने कुषाणों के साथ साथ सातवाहनों के क्षेत्र पर भी अपना अधिपत्य कायम किया। 
  • गुप्त साम्राज्य मौर्य जितना बड़ा तो नहीं था फिर भी इसने 335 ई. से 455ई. तक उत्तर भारत पर एक छत्र राज्य किया। 
  • ईसा की तीसरी सदी के अंत में गुप्त वंश का आरंभिक राज्य उत्तर प्रदेश और बिहार में था। गुप्तकालीन अवशेषों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि उपलब्धियों की दृष्टि से उत्तर प्रदेश उस समय सबसे समृद्ध स्थान था। 
  • गुप्त साम्राज्य के सिक्कों पर अंकित घुड़सवार दर्शाते हैं कि उस समय घुड़सवारों की भूमिका प्रमुख रही होगी। 
  • अनुकूल व्यापारिक परिस्थितियों के बल पर गुप्त शासकों ने अपना आधिपत्य  मध्य गंगा मैदान , प्रयाग , साकेत और मगध पर स्थापित कर लिया। 
  • समय बीतने के साथ साथ गुप्त साम्राज्य ने अपना अधिकार संपूर्ण भारत पर काबिज कर लिया। 
गुप्त साम्राज्य के प्रसिद्ध शासक

चन्द्रगुप्त प्रथम (319 - 334 ई.) :- गुप्त वंश का पहला प्रसिद्ध शासक चन्द्रगुप्त प्रथम हुए। उसने एक लिच्छवी राजकुमारी से विवाह किया जो कि संभवतः नेपाल की थीं। चन्द्रगुप्त प्रथम एक महान शासक हुआ क्यूंकि उसने 319-20  ई. में अपने राजगद्दी पर बैठने के स्मारक में गुप्त संवत चलाया। 

समुद्रगुप्त  (335 - 380 ई.) :- चन्द्रगुप्त प्रथम के पुत्र और उत्तराधिकारी समुद्रगुप्त ने गुप्त साम्राज्य का अत्यधिक विस्तार किया। वह अशोक के विपरीत हिंसा और विजय में आनंद पाता था। हरिषेण उसका दरबारी कवि था। हरिषेण ने एक अभिलेख लिखा जिसमें उल्लेखित किया कि समुद्रगुप्त ने किन किन शासकों को पराजित किया , यह अभिलेख प्रयाग में हैं और उसी स्तंभ पर है जिसपर शांतिकामी अशोक के अभिलेख हैं। समुद्रगुप्त  ने अपने साम्राज्य विस्तार के क्रम में गंगा - दोआब क्षेत्र , पूर्वी हिमालय राज्यों , नेपाल , असम ,बंगाल, पंजाब , विंध्य क्षेत्र , पूर्वी दक्कन तक को येन केन प्रकारेण हराकर सत्ता स्थापित कर ली। समुद्रगुप्त की आकांक्षाएँ बढ़ते बढ़ते तमिलनाडु के कांची तक पंहुचीं जहां पल्लवों पर अधिकार जमाया। समुद्रगुप्त को अपनी वीरता और युद्ध कुशलता के लिए "भारत का नेपोलियन " कहा जाता है। 

चन्द्रगुप्त द्वितीय  (380  - 412 ई.) :- चन्द्रगुप्त द्वितीय के शासन काल में गुप्त साम्राज्य अपने उत्कर्ष की चोटी पर पहुंचा। उसने विवाह व विजय दोनों के माध्यम से साम्राज्य की सीमा बढ़ाई। चन्द्रगुप्त ने अपनी कन्या प्रभावती का विवाह वाकाटक के राजा से कराया , जो ब्राह्मण जाति का था और मध्य भारत में शासन करता था। उसके मरने के बाद उसका नाबालिग पुत्र उत्तराधिकारी बना इस तरह चन्द्रगुप्त ने अपनी शक्ति को मध्य भारत से मालवा तक विस्तृत कर लिया और उसे पश्चिमी समुद्र तट मिल गया जिससे उसका व्यापार और भी आसान हो गया। इस तरह मालवा और उसका मुख्य नगर उज्जैन और भी समृद्ध हो गए , संभवतः चन्द्रगुप्त द्वितीय ने उज्जैन को अपनी दूसरी राजधानी बनाया था। 
  चंद्रगुप्त ने विक्रमादित्य की उपाधि धारण की थी।  यह उपाधि इससे पूर्व 57 ई.पू. में उज्जैन के शासक ने भी पश्चिमी भारत में शक क्षत्रपों पर विजय पाने के उपलक्ष्य में धारण की थी। चन्द्रगुप्त द्वितीय का उज्जैन स्थित दरबार  कालिदास और अमर सिंह जैसे बड़े बड़े विद्वानों से विभूषित था।  चन्द्रगुप्त द्वितीय के समय में ही चीनी यात्री फाह्यान भारत आया था। 



गुप्त साम्राज्य का पतन

चन्द्रगुप्त द्वितीय के उत्तराधिकारियों को ईसा की पांचवी सदी के उत्तरार्ध में मध्य एशिया के हूणों के आक्रमण का सामना करना पड़ा , शुरू में तो गुप्त सम्राट स्कंदगुप्त ने हूणों को भारत में आगे बढ़ने से रोकने के लिए बहुत कोशिश की लेकिन उसके उत्तराधिकारी कमजोर हुए और हूणों के सामने टिक नहीं पाए। 485 ई. में आकर हूणों ने पूर्वी मालवा और मध्य भारत के हिस्से को अपने कब्जे में ले लिया यहां उनके अभिलेख पाए गए हैं, फलस्वरूप छठी सदी के आरंभ में गुप्त साम्राज्य बहुत छोटा हो गया। मालवा नरेश ने गुप्त शासकों की सत्ता को भी चुनौती दे दी और सारे उत्तर भारत में अपना प्रभुत्व स्थापित किया जिसके उपलक्ष्य में 532 ईसवी में विजय स्तंभ खड़े किये 
    गुप्त राज्य की विशाल वेतनभोगी सेना के खर्च में कमी होने लगी क्योंकि धार्मिक या अन्य वजह से ग्रामदान की परिपाटी जोर पकड़ती जा रही थी , जिससे आमदनी कम होती चली गयी। धीरे- धीरे गुप्त साम्राज्य स्वर्णमुद्राओं में भी मिलावट करने लगा और शासन छठी सदी के बीच तक किसी न किसी तरह चलता रहा लेकिन महिमा लगभग 100 साल पहले ही समाप्त हो चुकी थी। 
September 12, 2018

BRAHMAPUTRA RIVER SYSTEM




  •  ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र विश्व के सबसे लम्बी नदियों में से एक प्रमुख नदी तंत्र है। 
  • यह जल विसर्जन के कुल आयतन की दृष्टि से विश्व के ४ बड़े नदियों में शामिल है। 
  • इसका अपवाह तंत्र तीन देशों तिब्बत , भारत , बांग्लादेश में विस्तृत है। 
  • यह भारत में 1346 किमी बहती है। 
  • यह कैलाश श्रेणी के दक्षिण मानसरोवर झील के पास महान हिमनद (आंग्सी ग्लेसियर )से निकलती है। 
  • इसका बेसिन मानसरोवर झील से मरियन ला दर्रे द्वारा अलग होता है। 
  • ब्रह्मपुत्र का तिब्बत क्षेत्र  में नाम सांग्पो (यारलुंग) है। इस क्षेत्र में समुद्र तल से 4000 मीटर की ऊंचाई पर भी नावें चलती हैं जो कि विश्व के विश्व के सबसे प्रसिद्ध नावमार्गों में से एक है। 
  • नामचा बरवा पर्वत के पूर्वी किनारे से यह एक तीखे मोड़ के साथ दक्षिण पश्चिम में मुड़ती है और 5500 मीटर गहरा कैनियन बनाती है। 
  • अरुणाचल प्रदेश में यह दिहांग कहलाती है। 
  • पासीघाट के निकट सदिया के पास दो सहायक नदियां दिबांग और लोहित के मिल जाने के बाद इसका नाम ब्रह्मपुत्र पड़ता है। 
  • इसके पश्चात यह असम घाटी में प्रवेश करती है , यहां कई सहायक नदियाँ ब्रह्मपुत्र से मिलती हैं। इनमें सुबानसिरी , जिया भरेली , धनश्री , पुथीमारी , पगलादिया और मानस प्रमुख है। 
  • असम  घाटी में ब्रह्मपुत्र नदी गुंफित जलमार्ग बनाती है जिसमें कुछ बड़े नदी द्वीप भी मिलते हैं। 
  • इनमें विश्व का सबसे बड़ा नदी द्वीप माजुली  भी शामिल है।  यह द्वीप संकटग्रस्त स्थिति में है तथा इसे संरक्षित करने व विश्व विरासत में शामिल करने के प्रयास किये जा रहे हैं। 
  • यहां ब्रह्मपुत्र नदी धुबरी शहर तक पश्चिम  की तरफ बहती है व उसके बाद गारो पहाड़ी से मुड़कर दक्षिण की तरफ बहते हुए गोलपारा के समीप बांग्लादेश में प्रवेश करती है। 
  • बांग्लादेश में इसका  हो जाता है। 
  • बांग्लादेश में तीस्ता आदि नदियां मिलकर अंत में पद्मा (गंगा ) में मिल जाती हैं। 
  • मेघना की मुख्य धारा बराक नदी का उद्भव मणिपुर की पहाड़ी से होता है , इसकी मुख्य सहायक नदियां माक़ू , तरंग , तुईवई , जिरी ,सोनाइ ,रुकनी , धलेश्वरी , जटिंगा आदि हैं। 
  • बराक नदी , बांग्लादेश में तब तक बहती है जब तक भैरव बाजार के निकट गंगा - ब्रह्मपुत्र नदी में इसका विलय नहीं हो जाता। 
ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियां
तीस्ता :- यह ब्रह्मपुत्र की सबसे पश्चिमी दाहिने तट की नदी है।  कंचनजंगा  से निकलते हुए यह दार्जिलिंग के पहाड़ियों में एक तीव्र पर्वतीय प्रवाह है , जिसमें रांगपो ,रंगित  तथा सेबक नदियां आकर मिलती हैं। इसके तट पर जलपाईगुड़ी शहर स्थित है। 

रंगित :- यह सिक्किम से उद्गमित होती है।  इसमें बड़ी संख्या में क्षिप्तिकाएं हैं। यह नदी पूरे विश्व में जल क्रीड़ा (रॉफ्टिंग ) के लिए प्रसिद्ध है। 

मानस  :- यह एक पूर्ववर्ती नदी है।  तिब्बत से निकलकर यह वृहत हिमालय में एक महाखड्ड का निर्माण करते हुए प्रवेश करती है। 

सुबनसिरी :- यह ब्रह्मपुत्र की एक बड़ी सहायक नदी है। हिमालय क्षेत्र में इस नदी का मार्ग लम्बा है। यह मिरि पहाड़ियों तथा अबोर पहाड़ियों को विभाजित करती है। 

बराक  :- यह नदी नागालैंड में माउंट जापोवा से निकलती है , मणिपुर में दक्षिण की तरफ बहती है तथा एक कैंची मोड़ लेती है। इसकी अनेक सहायक नदियां जो मिजोरम के उत्तरी भाग को अपवाहित करती हैं , एकजुट होकर सिलचर तथा काछार जिले से होकर गुजरती है। बराक बेसिन में  मासिनराम तथा  चेरापूंजी  है जहाँ विश्व में सबसे अधिक वर्षा होती है। 

मणिपुर नदी  :- यह नदी मणिपुर के उत्तरी भाग से निकलती है तथा दक्षिण की तरफ बहती है।  इम्फाल से गुजरते हुए यह नदी लोकटक झील को अपवाहित करती है तथा चिंदविन घाटी में जाकर मिलती है जो म्यांमार में इरावदी की सहायक नदी है। 

BY-         
A.K.

Saturday, September 1, 2018

September 01, 2018

गंगा नदी : अपवाह तंत्र


गंगा नदी : अपवाह तंत्र

     गंगा नदी का उद्गम उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में माना दर्रे के निकट स्थित गोमुख हिमनद से होता है। यहां इसे भागीरथी कहा जाता है। देवप्रयाग में भागीरथी अलकनंदा से मिल जाती है , अलकनंदा का स्रोत सतोपंथ हिमनद  है जो बद्रीनाथ के उत्तर में तथा नीति दर्रे के निकट स्थित है।  यह हरिद्वार के निकट मैदानी भाग में प्रवेश करती है। गंगा नदी भागीरथी और अलकनंदा नदी का सम्मिलित रूप है जो देवप्रयाग के पास मिलकर गंगा बन जाती हैं। 
  • इसमें दाहिने तरफ से इलाहाबाद में यमुना नदी  मिलती है। 
  • दक्षिणी पठार से इसमें सोन नदी मिलती है। 
  • आगे बढ़ने पर दामोदर नदी छोटा नागपुर पठार से बहती हुई आ कर मिलती है। 
  • टोंस नदी भी दाहिने तरफ से आकर मिलती है। 
  • गंगा नदी के बाएं तरफ से  वाली मुख्य नदियां , पश्चिम से पूर्व की तरफ - रामगंगा , गोमती , घाघरा , गंडक , कोसी ,बूढी गंडक , बागमती , महानंदा। 
  • गंगा नदी की सबसे ज्यादा लंबाई उत्तर प्रदेश में है। 
  • राज महल पहाड़ियों के नजदीक प.बंगाल के मालदा जिले के फरक्का बैराज (बांध ) के बाद गंगा नदी दक्षिण पूर्व में मुड़ जाती है। इसके बाद यह  भागों में बंट जाती है , भागीरथी -हुगली तथा पद्मा। 
  • हुगली कोलकाता से गुजरती है और पद्मा,  बांग्लादेश में प्रवेश करती है।  
  • ब्रह्मपुत्र नदी पद्मा से मिलकर आगे बढ़ती है और फिर इसमें मेघना नदी मिल जाती है , यही मेघना नाम से ही यह बंगाल की खाड़ी में गिरती है। 
  • "गंगा -ब्रह्मपुत्र " डेल्टा विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा क्षेत्र है , इसका विस्तार हुगली और मेघना नदियों के बीच है। 
  • सुंदर वृक्ष की अधिकता के कारण ही यह क्षेत्र "सुंदर वन डेल्टा " कहलाता है। 



गंगा की सहायक नदियां 

रामगंगा :-     यह गढ़वाल की पहाड़ियों से निकलती है। यह उत्तरप्रदेश में नजीबाबाद के पास मैदानी भाग में प्रवेश करती है। कन्नौज के पास यह गंगा में मिल जाती है। 

शारदा (सरयू ) :-     यह नेपाल हिमालय के मिलाम हिमानी से निकलती है , शुरू में इसे गौरी-गंगा कहा जाता है। भारत नेपाल सीमा पर यह कोली कही जाती है।  उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में यह घाघरा से मिल जाती है। यहां इसे चौक कहा जाता है। 

गंडक  :-      गंडक नदी , धौलागिरि व एवरेस्ट पर्वत के बीच के नेपाल हिमालय से उद्गमित होती है। बिहार के चंपारण जिले में यह गंगा नदी के मैदान में प्रवेश करती है और पटना के निकट सोनपुर में यह गंगा से मिल जाती है। 

कोसी  :-  यह गंगा की सबसे बड़ी सहायक नदी है। यह एक पूर्ववर्ती नदी है।  इसकी मुख्यधारा अरुण नदी जो कि एवरेस्ट पर्वत के उत्तर में तिब्बत से निकलती है।  प्रायः मार्ग बदलने के कारण इसे " बिहार का शोक " कहा जाता है। 

महानंदा  :-  यह नदी दार्जिलिंग की पहाड़ियों से उद्गमित हो कर गंगा में मिल जाती है। भारत में यह गंगा नदी के बायें तट की अंतिम सहायक नदी है। 

केन  :-  इसका पौराणिक नाम कर्णवती है , यह मध्य प्रदेश के कैमूर पहाड़ियों से निकलती है।  उत्तरप्रदेश के बाँदा के निकट यह यमुना से मिल जाती है। इस नदी के तट पर चित्रकूट स्थित है। 

सोन नदी :-  यह अमरकंटक की पहाड़ियों में  नर्मदा के उद्गम स्थान के निकट से निकलती है। यह गंगा के दाएं तरफ से मिलने वाली प्रमुख सहायक नदीयों में से एक है। इसके रेत में सोने के कण पाए जाते हैं इसीलिए इसे स्वर्ण नदी कहा जाता है। 

दामोदर  नदी :-  दामोदर नदी पश्चिम बंगाल तथा झारखंड में बहने वाली एक प्रसिद्ध नदी है। यह झारखंड के छोटा नागपुर पठार क्षेत्र से निकलती है और पश्चिम बंगाल पंहुचती है। आगे चलकर यह हुगली नदी से मिलती है तत्पश्चात बंगाल की खाड़ी में गिरती है। अचानक बाढ़ आने के कारण इसे " बंगाल का अभिशाप " भी कहा जाता था। भारत के प्रमुख कोयला व अभ्रक क्षेत्र इसी घाटी में हैं। 

यमुना  नदी :-  यह गंगा की प्रमुख सहायक नदी है। यह टिहरी -गढ़वाल जिले के यमुनोत्री हिमनद से निकलती है। हिमालय में उत्तर की तरफ से मसूरी श्रेणी के पीछे  इसमें टोंस नदी मिलती है। यह हरियाणा तथा उत्तर प्रदेश के बीच एक सीमा बनाते हुए आगे बढ़ती है और दिल्ली , मथुरा , आगरा से होकर गुजरती है।  इसमें मालवा पठार से बहती हुई चंबल , सिंध , बेतवा तथा केन नदियां आ कर मिलती हैं। 

चंबल  नदी :-   यह नदी मध्य प्रदेश के मालवा पठार क्षेत्र के महू स्थान से निकलती है। यह पहले उत्तर दिशा में राजस्थान के कोटा तक बहती है फिर बूंदी , सवाई माधोपुर और धौलपुर होते हुए यमुना से आकर मिल जाती है। यह अपनी उत्खात (बीहड़ ) जमीन के लिए प्रसिद्ध है। यह राजस्थान की एक मात्र सदानीरा नदी है। बनास , पार्वती , काली -सिंध , व क्षिप्रा नदी इसकी सहायक नदियां हैं। 
September 01, 2018

UPPCL- ARO - COMPUTER ,FAQ-1


                                   GS ATOM
Top 50 Computer Faq for    UPPCL -ARO

PART  - 1

  1.  What is the Shortcut key to open Windows Explorer (File Explorer)   -  Window Key +E
  2.   Who provides internet access by transmitting digital data over telephone lines -- DSL(Digital Subcriber Line)
  3. Which area in MS-Excel windows allows entering values and formulas -- Formula bar .
  4. A mouse , trackball and joystick are example of - Pointing devices.
  5.  E- Commerce - Buying and selling of products and services over the internet. 
  6. The shortcut key used for pasting text from clipboard is - Ctrl + V
  7. You click at U to make the select text - Underline
  8. What is the shortcut key to display "Insert Hyperlink " dialog box in document   - Ctrl + K
  9. A character that is raised above the base line and is smaller is known as - Superscript .
  10. If you want to improve the performance of your PC , you need to upgrade  - CPU
  11. Ctrl , Shift and Alt are called - Modifier Keys
  12. The removal of errors from computer software is called  - Debugging.
  13. Windows 8 is an example of - An operating system
  14. What is the shortcut key for making the selected text subscript in MS-Word  -  Ctrl + =
  15. Which key deletes the character to the left of the cursor  - Backspace.
  16. What is the keyboard shortcut for creating a chart from the selected cell range in Excel - F11
  17. Which is used to read hand written or printed text to make a digital image that is stored in memory  - Scanner  
  18. To view information on the web you must have a - Web Browser.
  19. An application on desktop can be opened through shortcut by - Double clicking, select icon then press enter, right click and choose "open "option .
  20. A CD-RW disk - Can be erased and rewritten.
  21. In preview mode you can view- All the page in your document .
  22. Word processing , spreadsheet and photo - editing are example of  - Application software. 
  23. The first network that planted the seeds of internet was - ARPANET
  24. As compared to 16 bit microprocessors. 8 bit microprocessors are limited in - Speed, Data handling capability.
  25. Microprocessor 8085 can address location up to 64 K. 
  26. The difference between memory and storage is that memory is temporary and storage is permanent .
  27. In OSI network architecture , the routing is performed by -- Network layer
  28. The parity bit is added for  -- Error Detection
  29. Mnemonic codes are used to assist human memory.
  30.  After completing the execution the microprocessor returns to  fetch state .
  31. Integration of multiple related files form a  Database.
  32. The relational data model represents the database as a collection of --Table
  33. Char is the integral data type in C.
  34. A blank EPROM has -- all bits set to logical 1.
  35. Int*P  is a pointer variable in C.
  36. Which byte of an instruction is loaded into IR register  -- First
  37. A UPS commonly has -- Rectifier, inverter, static switch.
  38. What is the name of memory buffer used to accommodate a speed differential - Cache memory
  39. Garbage collection involves traversing the entire file system, marking everything that can be accessed.
  40. One of the common forms of representing remote sensing data as information is in the form of - Thematic Maps.
  41. The network is overloaded with enormous data sent by many computers within the network . The inability of the network to deliver the data is termed as - Congestion
  42. HTTP is an application protocol .
  43. In IT, data integrity means that the data available in the database in both accurate and consistent.
  44. PARAM is a series of super computers designed and assembled by the Centre for Development of Advanced Computing  (C-DAC) in pune , India.
  45. CPU is also known as the brain of the computer.
  46. Data definition language defines data types and the relationships among them.
  47. Syntax errors are determined by Control Unit.
  48. How many MB is equal to 1 Terabyte - 1024 * 1024
  49. How many layers are there in the TCP/IP model - 4 layers( application layer, transport layer , internet layer , Network access layer)
  50. The function of DNS (Domain name system) is to convert domain name into IP address.

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Friday, August 31, 2018

August 31, 2018

समानता का अधिकार


 समानता का अधिकार
  • संविधान का भाग - 3 , अनुच्छेद 14 से अनुच्छेद 18 समता का अधिकार प्रदान करता है। 
  • अनुच्छेद 14 समता के अधिकार का मूल सिद्धांत प्रतिपादित करता है तथा अनुच्छेद 15 -18 समता के अधिकार के मूल सिद्धांत के विशिष्टताओं को बताता है। 
  • अनुच्छेद 14 -  भारत में सभी व्यक्तियों को विधि के समक्ष समता और विधियों का समान संरक्षण प्रदान करता है। 
    • इसके अनुसार राज्य देश के किसी भी व्यक्ति को विधि के समक्ष समता या विधियों के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा। 
  • अनुच्छेद 15 -   राज्य को धर्म , मूल वंश , जाति , लिंग या जन्म स्थान के आधार विभेद से रोकता है। 
  • अनुच्छेद 16 - सार्वजनिक नियोजन (सरकारी नौकरियों ) में अवसर की समानता के बारे में है। 
  • अनुच्छेद 17 - अस्पृश्यता का उन्मूलन किया जाएगा , अस्पृश्यता से उतपन्न होने वाली निर्योग्यता को लागू करना अपराध घोषित किया गया है। 
  • अनुच्छेद 18 -  सेना या शिक्षा संबंधी उपाधियों के अतिरिक्त अन्य उपाधियों को राज्य द्वारा दिए जाने पर प्रतिबंध। 
विधि के समक्ष समता - अनु. 14  : -
  •   "विधि के समक्ष समता " का विचार ब्रिटिश मूल का है , जबकि " विधियों के समान संरक्षण " को अमेरिका के संविधान से लिया गया है। 
  • अनुच्छेद 14 में "व्यक्ति" शब्द का प्रयोग हुआ है अर्थात अनुच्छेद 14 नागरिकों , अनागरिकों , कम्पनी , निगम , व्यक्ति समूह आदि सब पर लागू  होता है।  
  • अनुच्छेद 14 में नैसर्गिक न्याय का सिद्धांत निहित है। 
  • मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ वाद में विधि क शासन  को संविधान का आधारभूत ढांचा घोषित किया गया है। 
  • अनुच्छेद  14 वर्ग विभेद को मना करता है लेकिन वर्गीकरण को मानता है। 
  • वर्गीकरण किया जा सकता है यदि उसका आधार उपयुक्त हो जैसे -
    •  भौगोलोक परिस्थिति के आधार पर 
    • राज्य के पक्ष में 
    • विशेष न्यायलय या प्रक्रिया के संबंध में 
    • ऐतिहासिक आधार पर 
    • शिक्षा के आधार पर 

धर्म ,जाति आदि आधार पर विभेद का प्रतिषेध  - अनु. 14  : -

  • अनुच्छेद 15 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार केवल नागरिकों के लिए हैं। 
  • अनुच्छेद 15 में कुल 5 उपखण्ड हैं। 
  • अनुच्छेद 15 (1) - केवल धर्म ,मूलवंश ,जाति ,लिंग ,जन्म स्थान अथवा इनमें से किसी आधार पर नागरिकों के मध्य विभेद करने से राज्य को रोकता है। 
  • केवल से तात्पर्य है कि विभेद मात्र धर्म , मूलवंश , जाति , लिंग, जन्मस्थान आधार पर निषेध है इसके अतिरिक्त भाषा , निवास स्थान आदि आधार पर विभेद हो सकता है। 
  • अनुच्छेद 15 (2) - कोई भी नागरिक केवल धर्म , मूल वंश , जाति , लिंग , जन्म स्थान या इनमें से किसी एक के आधार पर सार्वजनिक स्थलों पर प्रवेश या उपयोग करने के लिए किसी शर्त या प्रतिबंध में  नहीं होगा। 
    •  सार्वजनिक स्थल अर्थात - दुकान , भोजनालय ,मनोरंजन स्थल , कुआँ , तालाब , स्नानघाट , सड़क आदि। 
  • अनुच्छेद 15 (3), 15 (4), 15 (5 ) अनुच्छेद 15 (1 ) व 15 (2 ) के अपवाद हैं। 
  • अनुच्छेद 15(3 ) -  यह अनुच्छेद राज्य को स्त्रियों और बालकों हेतु विशेष प्रावधान करने की शक्ति प्रदान करता है।
    •  अनुच्छेद 15(3 )  के आधार पर ही महिलाओं का घरेलू हिंसा से संरक्षण अधिनियम -2005 , को संवैधानिक घोषित किया गया है। 
  • अनुच्छेद 15(4 ) - इस अनुच्छेद द्वारा शिक्षण संस्थाओं में सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों , अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को आरक्षण दिया गया है। 
    •  अनुच्छेद 15(4 ) को प्रथम संविधान संशोधन अधिनियम 1951 द्वारा स्थापित किया गया था। 
  • अनुच्छेद 15(5 ) -  इसके माध्यम से निजी शिक्षण संस्थाओं में छात्रों के प्रवेश के लिए स्थानों के आरक्षण का प्रावधान किया गया है। 
    •  अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान इस दायरे में नहीं हैं। 
    • केंद्रीय शिक्षण संस्थान (प्रवेश में आरक्षण ) अधिनियम -2005 को इसी के अनुसार संवैधानिक घोषित किया गया। 
अवसर की समानता   - अनु. 16 : -
  • अनुच्छेद 16 , लोक नियोजन में अवसर की समानता की प्रत्याभूति प्रदान करता है। 
  • अनुच्छेद 16 द्वारा प्रदत्त अधिकार केवल नागरिकों को हैं। 
  • अनुच्छेद 16 (1 ) - राज्य के अधीन किसी पद पर नियोजन अथवा नियुक्ति के संबंध में सभी नागरिकों को समान अवसर प्राप्त होंगें। 
    •  यह केवल प्रारंभिक नियुक्ति के लिए ही नहीं बल्कि पदोन्नति , पदच्युति , वेतन , अवकाश , ग्रेच्युटी ,पेंशन आदि में भी लागु होता है। (UPPSC -1994 )
  • अनुच्छेद 16(2)- इस विषय में केवल धर्म , मूलवंश ,जाति , लिंग , जन्म स्थान , उद्भव एवं निवास के आधार पर नागरिकों के बीच कोई भेद भाव नहीं किया जाएगा।  
  • अनुच्छेद 16(3) -  यह अनुच्छेद 16(2) का अपवाद है। 
    •  यह संसद को शक्ति प्रदान करता है कि वह विधि द्वारा किसी राज्य की कुछ सरकारी सेवाओं में नियुक्ति के लिए उस राज्य में "निवास की अहर्ता " को विहित कर दे। 
    • इस शक्ति के प्रयोग में संसद ने लोक नियोजन अधिनियम -1957 पारित किया था। 
    • किसी व्यक्ति को इस आधार पर निर्योग्य नहीं माना जाएगा कि  वह किसी राज्य विशेष का निवासी नहीं है। 
    • किन्तु यह नियम हिमांचल प्रदेश , मणिपुर ,त्रिपुरा में उनके पिछड़ेपन के कारण लागू नहीं है। 
  • अनुच्छेद 16(4) -  इसमें पिछड़े वर्गों को आरक्षण  का प्रावधान है। 
    •  इसके अंतर्गत राज्य जाति के आधार पर विभेद कर सकती है। 
    • यह अनुच्छेद 16(2) का दूसरा अपवाद है। 
    • अनुच्छेद 340 के अंतर्गत राष्ट्रपति "पिछड़ा वर्ग आयोग " की नियुक्ति करता है। 
    • मंडल आयोग के मामले में यह अवधारित किया गया कि पिछड़े वर्ग का निर्धारण जाति के आधार पर किया जा सकता है, जाति को भी सामाजिक वर्ग माना गया। 
    • मंडल आयोग वाद में अवधारित किया गया कि पिछड़े वर्ग को दिया गया 27 % आरक्षण वैध है किन्तु पिछड़ों में संपन्न वर्ग को आरक्षण नहीं मिलना चाहिए। 
    • अनुच्छेद 16(4क) - इसे 77 वें संविधान संशोधन अधिनियम 1995 द्वारा जोड़ा गया। इसमें राज्य को शक्ति दी गयी कि वह अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों के लिए प्रोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था कर सकती है , यदि उसकी राय में राज्य के अधीन सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। 
    • अनुच्छेद 16(4ख ) - इसे 81 वें संविधान संशोधन द्वारा जोड़ा गया , इससे सेवाओं के आरक्षण में अग्रनयन(Carry for ward rule) को मान्यता दी गयी। 
    • इसके अनुसार यदि किसी वर्ष आरक्षित स्थान नहीं भरे जा सके तो बकाया आरक्षित स्थानों को एक अलग वर्ग माना जाएगा तथा आगे के वर्षों में अलग श्रेणी के रूप में भरा जाएगा। 
  • अनुच्छेद 16 (5) - राज्य द्वारा निर्मित कोई ऐसी विधि जो किसी धार्मिक या सांप्रदायिक संस्था के किसी पदाधिकारी या सदस्य के रूप में किसी विशिष्ट धर्म या संप्रदाय के लोगों की नियुक्ति किये जाने का प्रावधान करती है , प्रवर्तनीय होगा। 
अस्पृश्यता का अंत  - अनु. 17  : -
  • अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता को समाप्त करने की व्यवस्था और किसी भी रूप में इसका आचरण निषिद्ध करता है। इससे उत्पन्न किसी अयोग्यता को लागु करना दंडनीय अपराध है। 
  • अनुच्छेद 35 संसद को अस्पृश्यता के संबंध में विधि बनाने की शक्ति प्रदान करती है। 
  • संसद  प्रयोग कर के "अस्पृश्यता अपराध अधिनियम - 1955 " पारित किया था। 1976 में इसमें संशोधन कर इसे सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 कर दिया गया। 
  • अनुच्छेद 17 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकार केवल राज्य के विरुद्ध ही नहीं वरन प्राइवेट व्यक्तियों के विरुद्ध भी लागू होते हैं। 
उपाधियों  का अंत  - अनु. 18  : - 
  • इसके द्वारा राज्य को उपाधियाँ प्रदान करने तथा नागरिकों व अनागरिकों को उपाधियाँ ग्रहण करने से प्रतिषेध किया गया है। 
  • अनुच्छेद 18(1 ) -  राज्य , सेना तथा विद्या संबंधी सम्मान के शिवाय और कोई उपाधि प्रदान नहीं करेगा।
  • अनुच्छेद 18(2 ) -  कोई भारतीय नागरिक किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि ग्रहण नहीं करेगा। 
  • अनुच्छेद 18(3) - ऐसा विदेशी व्यक्ति जो भारत में कोई लाभ या विश्वास का पद धारण करता है वह किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि राष्ट्रपति के सहमति पश्चात ही ग्रहण कर सकता है। 
  • अनुच्छेद 18(4) - कोई व्यक्ति जो भारत में किसी लाभ या विश्वास के पद पर है , किसी विदेशी राज्य से कोई भेंट , उपलब्धि , पद बिना राष्ट्रपति के अनुमति के ग्रहण नहीं कर सकता। 
  • अनुच्छेद 18 सिर्फ निदेशात्मक है , आदेशात्मक नहीं अर्थात इसका उल्लंघन दंडनीय नहीं है। 
  • बालाजी राघवन बनाम भारत संघ (1996 ) के मामलें में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा धारित किया गया कि भारत रत्न , पद्म विभूषण और पद्म श्री अलंकरण अनु. 18(1) में प्रयुक्त  "उपाधि" शब्द के अंतर्गत नहीं आते हैं। 

Saturday, August 25, 2018

August 25, 2018

सीधी भर्ती में अब स्क्रीनिंग परीक्षा के भी अंक जुड़ेंगे


सीधी भर्ती में अब स्क्रीनिंग परीक्षा के भी अंक जुड़ेंगे -

                     जैसा कि सबको पता है कि इस समय एक तरफ उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में सीबीआई जाँच की वजह से खलबली मची है और जाँच के दौरान सीबीआई ने सीधी भर्ती की प्रक्रिया में धांधली होने से संबंधित कई अहम दस्तावेज भी जब्त किये हैं।  सीधी भर्ती प्रक्रिया हर समय सवालों के घेरे में रही है क्योंकि इसमें चयन केवल इंटरव्यू के नंबरों के आधार पर किया जाता है। सीधी भर्ती के जिन पदों पर आवेदन अधिक आते हैं वहां आयोग आवेदकों की छंटनी के लिए लिखित स्क्रीनिंग परीक्षा भी करवा देता है और इसमें सफल अभ्यर्थियों का ही इंटरव्यू लिया जाता है जबकि ध्यान देने योग्य यह है कि इस स्क्रीनिंग परीक्षा के अंक अंतिम चयन में काम  नहीं आते हैं। अर्थात स्पष्ट है कि अंतिम मेरिट मात्र इंटरव्यू में मिले अंकों के आधार पर बनती है। 
            शुक्रवार को आयोग ने एक बैठक में संघ लोक सेवा आयोग में लागू व्यवस्था के आधार पर यह निर्णय लिया कि अब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में भी सीधी भर्तियों में स्क्रीनिंग परीक्षा के अंक अंतिम मेरिट के लिए जोड़े जाएंगे। इसे लागू करने के लिए नियमावली तैयार की जाएगी , इसके लिए आयोग की तरफ से शासन को संस्तुति भेजने की प्रक्रिया की जा रही है। शासन से इस विषय में नियमावली बनने के बाद इस नवीन व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा जिससे कि परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी। 

         नए नियम के अनुसार सीधी भर्ती के जिन पदों पर चयन प्रक्रिया में स्क्रीनिंग परीक्षा कराई जाएगी , उनमें स्क्रीनिंग परीक्षा में कुल प्राप्त अंकों के 50 प्रतिशत और साक्षात्कार में प्राप्त अंकों के 50 प्रतिशत को जोड़ कर अंतिम मेरिट सूची तैयार की जाएगी जिसके आधार पर चयन प्रक्रिया संपन्न होगी। सीधी  भर्ती प्रक्रिया में अभी तक कुल रिक्तियों के सापेक्ष आए आवेदन पर एक पद के सापेक्ष आठ गुना अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया जाता था 

            ध्यान दें कि आयोग उन्हीं पदों पर भर्ती के लिए स्क्रीनिंग परीक्षा आयोजित करता है जिसमें अभ्यर्थियों की संख्या अधिक हो जाती है , क्योंकि सभी को साक्षात्कार में शामिल नहीं किया जा सकता इस लिए परीक्षा के माध्यम से छंटनी की जाती है। इनमें GIC प्रवक्ता , मेडिकल अफसर ,सहायक सांख्यिकी अधिकारी जैसे पद होते हैं। 

August 25, 2018

Fundamental Rights -1


मौलिक अधिकार 
  भाग -३ ,अनु. 12 - अनु.35   

  • मूल अधिकार का सर्वप्रथम विकास ब्रिटेन में हुआ था। 
  • भारत में मूल अधिकारों की मांग सर्वप्रथम संविधान विधेयक 1895 के माध्यम से की गई थी।
  •  भारतीयों को मूल अधिकार प्रदान करने की मांग 1917 - 1919 के दौरान कांग्रेस द्वारा , 1925 में एनी बेसेंट द्वारा कॉमनवेल्थ ऑफ़ इंडिया बिल के माध्यम से तथा 1928 में मोतीलाल नेहरू द्वारा नेहरू रिपोर्ट के माध्यम से की गयी थी।
  •  1927 में कांग्रेस के मद्रास अधिवेशन तथा 1930 के करांची अधिवेशन में इसके संबंध में प्रस्ताव पास किया गया था। 
  • 1935 के भारत शासन अधिनियम में इसे शामिल नहीं किया गया था। 
  • संविधान निर्माण के समय संविधान सभा द्वारा मूल अधिकार तथा अल्पसंख्यक अधिकार के संबंध में परामर्श हेतु सरदार वल्लभ भाई पटेल के अध्यक्षता में एक परामर्श समिति का गठन किया एवं एक उपसमिति का गठन जे.बी. कृपलानी की अध्यक्षता में किया गया था , इनकी सिफारिश के आधार पर भारतीय संविधान के भाग - 3 में मूल अधिकार संबंधी प्रावधान किये गए। 
  • भारत में मूल अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त विशेष अधिकार है। 
  • मूल अधिकार वे अधिकार हैं जो व्यक्ति के जीवन के लिए मूलभूत तथा अपरिहार्य होने के कारण संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदान किये गए हैं।  सामान्यतया व्यक्ति के इन अधिकारों में राज्य के द्वारा भी हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है। 
  • भारतीय संविधान का भाग तीन , अनुच्छेद 12 से 35 (कुल 27 ) मूल अधिकारों के बारे में हैं। 
  • भारतीय संविधान का भाग तीन अमेरिका के बिल ऑफ़ राइट्स से प्रेरित है। 
  • भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों की प्रकृति सकारात्मक और नकारात्मक दोनों है। 
  • मूल अधिकार न्याय योग्य हैं , अतः इन्हें न्यायालय द्वारा लागू कराया जा सकता है। 
  • संसद अनु. 368 के तहत इसमें संशोधन कर सकती है।  
                              भारत का मूल संविधान कुल 7 मौलिक अधिकार अपने नागरिकों को प्रदान करता था , किन्तु 44 वें संविधान संशोधन अधिनियम 1978 द्वारा संपत्ति के अधिकार को समाप्त कर दिया गया। संपत्ति का अधिकार अनुच्छेद 19 (1) (च) तथा अनुच्छेद 31 में वर्णित था जो कि अब अनु. 300 क के तहत एक विधिक अधिकार है। 
            वर्तमान में भारतीय नागरिकों को कुल 6 मूल अधिकार प्राप्त हैं - 
  1. समानता का अधिकार  (अनुच्छेद 14 - अनुच्छेद  18 )
  2. स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19  - अनुच्छेद  22)
  3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23 - अनुच्छेद  24)
  4. धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25 - अनुच्छेद 28 )
  5. संस्कृति तथा शिक्षा संबंधी अधिकार (अनुच्छेद 29 - अनुच्छेद 30)
  6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32)
अनु. 12 - परिभाषा 
अनु. 13 - मूल अधिकारों से असंगत या उनका अल्पीकरण करने वाली विधियां 
अनु. 14 - विधि के समक्ष समानता 
अनु. 15 - धर्म, मूलवंश , जाति ,लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध 
अनु. 16 - लोक नियोजन के विषय में अवसर की समानता 
अनु. 17 - अस्पृश्यता का अंत 
अनु. 18 - उपाधियों का अंत 
अनु. 19 - वाक्-स्वातंत्र्य आदि विषयक कुछ अधिकारों का संरक्षण 
अनु. 20 - अपराधों के लिए दोषसिद्धके संबंध में संरक्षण 
अनु. 21 - प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण 
अनु. 22 - कुछ दशाओं में गिरफ़्तारी और निरोध से संरक्षण 
अनु. 23 - मानव के दुर्व्यापार और बलातश्रम का प्रतिषेध 
अनु. 24 - कारखानों आदि में बालकों के नियोजन का प्रतिषेध 
अनु. 25 - देश के सभी नागरिकों को अंतःकरण की स्वतन्त्रता , किसी भी धर्म को अबाध रूप से मानने ,आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता 
अनु. 26 -धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतन्त्रता 
अनु. 27 - किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए करों के संदाय के बारे में स्वतन्त्रता 
अनु. 28 -कुछ शिक्षण संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा , उपासना में उपस्थित होने की स्वतन्त्रता 
अनु. 29 - अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण 
अनु. 30 -शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार 
अनु. 32 - संविधान के भाग 3 द्वारा प्रदत्त अधिकारों को प्रवर्तित करने के लिए उपचार  
अनु. 33 - संविधान के भाग 3 द्वारा प्रदत्त अधिकारों को लागू होने में उपांतरण  करने की शक्ति 
अनु. 34 - जब किसी क्षेत्र में सेना विधि प्रवृत्त है , तब इस भाग द्वारा प्राप्त अधिकारों पर निर्बंधन 
अनु. 35 - इस भाग के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए विधि।  
August 25, 2018

PHYSICS- TOP 50 ONE LINER FAQ PART -2


TOP 50 ONE LINER - FAQ- PHYSICS

  1. कार्य का मात्रक जूल होता है। 
  2. प्रकाश वर्ष दूरी मापने की इकाई है। 
  3. विद्युत धारा मापने का मात्रक ऐम्पियर होता है। 
  4. पारसेक भी दूरी की इकाई है। 
  5. ल्यूमेन , ज्योति फ्लक्स का मात्रक है। 
  6. ज्योति तीव्रता का मात्रक कैंडिला है। 
  7. पदार्थ के संवेग और वेग के अनुपात से द्रव्यमान प्राप्त किया जाता है। 
  8. शून्य में स्वतंत्र रूप से गिरने वाली वस्तुओं का त्वरण समान रहता है। 
  9. किसी भी स्थिर या गतिशील वस्तु की स्थिति और दिशा में तब तक कोई परिवर्तन नहीं होता जब तक उस पर कोई बाह्य बल सक्रिय न हो -यह न्यूटन का गति विषयक प्रथम नियम है। 
  10. रॉकेट संवेग संरक्षण के सिद्धांत पर कार्य करता है। 
  11. अश्व यदि अचानक चलना शुरू कर  दे तो अश्वारोही गिर सकता है जिसका कारण विश्राम जड़त्व होता है।
  12. चलती हुई बस में जब अचानक ब्रेक लगता है तो उसमें बैठे यात्री आगे की तरफ गिरते हैं जिसकी वजह - न्यूटन का गति विषयक प्रथम नियम। 
  13. शरीर का वजन ध्रुवों पर अधिकतम होता है। 
  14. एक अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की तुलना में चन्द्रमा के तल पर अधिक ऊँची छलांग लगा सकता है क्योंकि चन्द्रमा के तल पर गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी तल की तुलना में अत्यल्प होता है। 
  15. यदि जल का तापमान 9°C  से गिराकर 3 °C कर दिया जाय तो जल का आयतन पहले घटेगा और बाद में बढ़ेगा। 
  16. एक बीकर में पानी पर बर्फ तैर रही है , जब बर्फ पूर्णतः पिघल जाएगी तो बीकर में पानी का तल - पहले जितना ही रहेगा। 
  17. जब किसी बोतल में पानी भरा जाता है और उसे जमने दिया जाय तो बोतल टूट जाती है क्यूंकि पानी जमने पर फैलता है। 
  18. सड़क पर चलने की अपेक्षा बर्फ पर चलना कठिन है क्योंकि बर्फ में सड़क की अपेक्षा घर्षण कम होता है। 
  19. एक नदी में चलता हुआ जहाज जब समुद्र में पहुँचता है तो वह थोड़ा सा ऊपर आ जाएगा। 
  20. लोहे की कील पारे में तैरती है जबकि जल में डूब जाती है क्योंकि लोहे का घनत्व पानी से अधिक है तथा पारे से कम। 
  21. पानी का घनत्व अधिकतम 4°C पर होता है। 
  22. वस्तु की मात्रा बदलने पर भी घनत्व अपरिवर्तित रहता है। 
  23. बर्फ के दो टुकड़ों को आपस में दबाने से टुकड़े आपस में चिपक से जाते है क्योंकि दाब अधिक होने से बर्फ का गलनांक घट जाता है।   
  24. हवाई  जहाज से यात्रा के दौरान वायुदाब में कमी के कारण पेन से स्याही निकलने लगती है। 
  25. ऊंचाई के स्थानों पर पानी 100 °C से निचे के तापमान पर उबलता है क्योंकि  वायुमण्डलीय दाब कम हो जाता है , अतः उबलने का बिंदु नीचे आ जाता है। 
  26. साबुन के बुलबुले के अंदर का दाब , वायुमंडलीय दाब से अधिक होता है। 
  27. वायुदाबमापी की रीडिंग में अचानक गिरावट से संकेत प्राप्त होता है कि मौसम तूफानी होने वाला है। 
  28. प्रेशर कुकर में खाना जल्दी पक जाता है क्योंकि अधिक दाब पर पानी अधिक तापक्रम पर उबलने लगता है। 
  29. हाइड्रोजन से भरा गुब्बारा वायु में ऊपर जाकर फट जाता है क्योंकि वायुदाब घट जाता है। 
  30. सूर्य में निरंतर ऊर्जा का सृजन लगातार हो रहे नाभिकीय संलयन प्रक्रिया के कारण होता है। 
  31. चाभी भरी हुई घडी में स्थितिज ऊर्जा होती है। 
  32. जब एक चल वस्तु की गति दुगुनी कर दी जाती है तो उसकी गतिज ऊर्जा चौगुनी हो जाती है। 
  33. साईकिल चलने वाला सड़क पर मोड़ लेते समय झुक जाता है जिससे कि गुरुत्व केंद्र आधार के अंदर बना रहे और वह गिरे नहीं। 
  34. दूध से मक्खन निकलने में अपकेंद्री बल लगता है। 
  35. यदि किसी पत्थर को पृथ्वी से चाँद पर ले जाया जाय तो  पत्थर का भार तो बदल जाएगा लेकिन द्रव्यमान वही रहेगा। 
  36. लिफ्ट में किसी व्यक्ति का प्रत्यक्ष भार वास्तविक भार से कम होता है जबकि लिफ्ट त्वरण के साथ नीचे जा रही हो। 
  37. लोलक की कालावधि लोलक के धागे की लंबाई पर निर्भर करती है। 
  38. लोलक घड़ियाँ गर्मी में सुस्त हो जाती हैं क्योंकि गर्मी में लोलक की लंबाई बढ़ जाती है जिससे इकाई दोलन में लगा समय बढ़ जाता है। 
  39. वर्षा की बूंद,  सतही तनाव के कारण गोलाकार होती है। 
  40. श्यानता की मापक इकाई प्वाइज है। 
  41. पराश्रव्य वे ध्वनियाँ हैं जिनकी आवृत्ति 20,000 Hz से अधिक होती है। 
  42. किसी मशीन की दूकान से होने वाला शोरगुल लगभग 100 डेसीबल का होता है। 
  43. यदि सितार और बांसुरी पर एक ही स्वर बजाया  जाय तो उनसे उत्पन्न ध्वनि का भेद केवल ध्वनि गुणता के अंतर से हो सकता है। 
  44. किसी ध्वनि स्त्रोत की आवृत्ति में होने वाले उतार चढ़ाव को डॉप्लर प्रभाव कहा  जाता है। 
  45. केल्विन मान से मानव शरीर का सामान्य तापमान 310 K होता है। 
  46. -40 °C तापमान होने पर पाठ्यांक सेल्सियस और फॉरेनहाइट तापमापियों में एक ही होंगे। 
  47. न्यूनतम संभव तापमान -273 °C है। 
  48. एक स्वस्थ्य मनुष्य के शरीर का साधारण ताप 37°C  होता है। 
  49. ठण्ड के मौसम में लोहे के गुटके और लकड़ी के गुटके को यदि सुबह छुएं तो लोहे का गुटका ज्यादा ठंडा लगता है क्योंकि लकड़ी की तुलना में लोहा ऊष्मा का अच्छा चालक होता है। 
  50. ग्रीष्म काल में हमें सफ़ेद वस्त्र पहनने की सलाह दी जाती है क्योंकि सफ़ेद वस्त्र ताप का न्यूनतम अवशोषण करते हैं।

Friday, August 24, 2018

August 24, 2018

संगम काल



तीन आरंभिक राज्य 
  • भारतीय प्रायद्वीप का दक्षिणी छोर , जो कृष्णा नदी के दक्षिण में पड़ता है , तीन राज्यों में बंटा हुआ था -
    •  चोल 
    • पाण्ड्य  
    • चेर या केरल  




पांड्य 
  • पांड्यों का उल्लेख सबसे पहले मेगस्थनीज ने किया था। मेगस्थनीज ने इनके राज्य को मोतियों के लिए प्रसिद्ध बताया था। 
  • पाण्ड्य राज्य भारतीय प्रायद्वीप के दक्षिण और दक्षिण पूर्वी भाग में था जिसमें मुख्य रूप से तमिलनाडु के तिन्नवेल्ली , रामनद और मदुरै शामिल थे। जबकि राजधानी मदुरै में थी। 
  • मेगस्थनीज ने पांड्य समाज को मातृसत्तात्मक कहा था , उसने ये भी कहा कि पांड्य राज्य का शासन स्त्री के हाथ में था। 
  • संगम साहित्य से पता चलता है कि यह राज्य धनाढ्य और समृद्ध था। 
  • पांड्य राजाओं ने रोमन सम्राट ऑगस्टस के दरबार में अपने राजदूत भेजे थे वे उनसे व्यापार भी करते थे। 
  • इस राज्य में ब्राह्मणों को उच्च स्थान प्राप्त था। 

चोल
  • चोल राज्य मध्य काल के शुरुआत में चोलमण्डलं (कोरोमंडल ) कहलाता था। 
  • यह पेन्नार और वेलार नदियों के मध्य पांड्य राज्य के लगभग  पूर्व- उत्तर में था। 
  • इनका वर्णन संगम साहित्य में भी मिलता है। 
  • इनके राजनीतिक  सत्ता का केंद्र उरैयूर था जो उस समय सूती कपड़े के व्यापार के लिए मशहूर था। 
  • चोलों का स्थायी इतिहास ईसा के दूसरी सदी में चोल राजा कारैकाल से शुरू होता है। 
  • उसने पुहार की स्थापना की और कावेरी नदी के किनारे लगभग 160 किमी लंबा बांध बनवाया था। 
  • पुहार की पहचान आधुनिक कावेरीपट्ट्नम से की गई है जो कि चोलों की राजधानी थी। 
  • चोल शासन काल में कावेरीपट्ट्नम व्यापार का बड़ा केंद्र था और इसका गोदीबाड़ा (डॉक ) विशाल था। 
  • चोलों का मुख्य व्यापार सूती कपड़ों का था , उनके पास एक कुशल नौसेना थी। 
  • कारैकाल के बाद धीरे धीरे सत्ता का ह्रास होता गया , चेरों और पांड्यों ने चोलों के राज्य को ध्वस्त कर दिया बची खुची सत्ता को उत्तर से पल्लवों ने नष्ट कर दिया। 
चेर
  • चेर राज्य पांड्य क्षेत्र के पश्चिम और उत्तर में फैला था। इस क्षेत्र में आधुनिक केरल और तमिलनाडु के कुछ भाग थे। 
  • चेर राज्य व चोलों और पांड्यों के बीच निरंतर युद्ध चलता रहता था , परन्तु बाद में चेर और चोल मित्र बन गए और आपस में वैवाहिक संबंध स्थापित किये। 
  • लेकिन कुछ समय बाद चेरों ने पांड्यों से मित्रता , और संधि कर चोलों के खिलाफ लड़ाई शुरू कर दी परन्तु चोलों ने दोनों को हरा दिया। 
  • कहा यह भी जाता है कि एक चेर राजा ने पीठ में घाव लगने के कारण लज्जित होकर आत्महत्या कर ली थी। 
दक्षिणी राज्यों की राज्य स्थिति -
  • ये मसाले विशेषकर काली गोल मिर्च उपजाते थे जिनकी विदेशों में बड़ी मांग थी। 
  • ये हाथी दांत का व्यापार भी करते थे। 
  • ये रत्न और खासकर मोतियों का निर्यात व्यापार भी करते थे। 
  • उरैयूर अपने सूती कपडे के व्यापार के लिए जाना जाता था। 
  • सेना अध्यक्षों को अनुष्ठान के बाद एनाडि की उपाधि दी जाती थी। 
  • शासक वर्ग को अरसर कहा जाता था। 
  • राज्यों में वर्ग और वर्ण ,जाति आधार पर सामजिक विषमता विद्यमान थी। 
  • पहाड़ी प्रदेशों के मुख्य स्थानीय देवता मुरुगन थे जो आरंभिक मध्य काल में सुब्रह्मण्यम कहे जाते थे। 
संगम साहित्य -
  • वर्तमान में दक्षिण भारत के इतिहास का जो कुछ भी पता चल पाता है उसका आधार संगम साहित्य ही है।
  • संगम तमिल कवियों का सम्मेलन था जो कि संभवतः किसी तत्कालीन राजा के आश्रय में आयोजित हुआ था। 
  • इन सम्मेलनों द्वारा रचित  संगम साहित्य लगभग 300 ई. से 600ई. के बीच संकलित किये गए थे। 
  • संगम मुख्य रूप से 2 भागों में बांटा जा सकता है -
    • आख्यानात्मक ग्रंथ मेलकड़क्कु - इनमें 18 मुख्य ग्रंथ हैं 
    • उपदेशात्मक ग्रंथ कीलकड़क्कु - 18 लघु ग्रंथ 
  • संगम ग्रंथों के अतिरिक्त एक और मुख्य ग्रंथ तोलकाप्पियम है जो कि व्याकरण और अलंकार का ग्रंथ है।
  • तमिल साहित्य के 2 प्रमुख महाकाव्य सिलप्पदिकाराम और मड़िमेखलै हैं। 
August 24, 2018

अपवाह तंत्र- सिंधु नदी तंत्र




       उत्पत्ति के आधार पर भारत की नदियों का वर्गीकरण मुख्यरूप से दो वर्गों में किया गया है -


  • हिमालय की नदियां 
  • प्रायद्वीपीय नदियां 
हिमालय की नदियां 
  • हिमालय की उत्पत्ति के पूर्व तिब्बत के मानसरोवर झील के पास निकलने वाली सिंधु , सतलज ,ब्रह्मपुत्र नदियां टेथिस सागर में गिरतीं थी। 
  • हिमालय की नदियां पूर्ववर्ती नदियों के उदाहरण हैं। इनके द्वारा गार्ज का निर्माण हुआ है। 
  • ये नदियां अभी भी युवावस्था में हैं और निरंतर अपरदन कार्य कर रही हैं। 
  •  चूँकि वर्षा जल के अलावा अतिरिक्त हिम पिघलने से भी इन्हें जल की आपूर्ति होती है , अतः ये सदानीरा हैं। 
  • मैदानी भागों में ढाल की न्यूनता के कारण ये विसर्पों का निर्माण करती हैं एवं प्रायः अपना मार्ग बदलती रहती हैं। 
  • हिमालय की नदियों को तीन प्रमुख नदी - तंत्रों में विभाजित किया गया है। 
    •  सिंधु नदी तंत्र 
    • गंगा नदी तंत्र 
    • ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र 
  • इन तीनों नदी तंत्रों का विकास एक अत्यंत विशाल नदी से हुआ है , जिसे शिवालिक या हिन्द ब्रह्म नदी कहा जाता था। यह नदी असम से पंजाब तक बहती थी। 



  • सिंधु नदी तंत्र : -
    •  इसके अंतर्गत सिंधु एवं सहायक नदियां जैसे झेलम , चिनाव , रावी, व्यास , सतलज (पंचनद ) सम्मिलित हैं। 
    • सिंधु तिब्बत के मानसरोवर झील के निकट "चेमायुंगडुंग " ग्लेशियर से निकलती है। 
    • यह ब्रह्मपुत्र से ठीक उलटी तरफ बहती है। 
    • भारत में इसकी लंबाई 1,114 किमी है तथ इसका संग्रहण क्षेत्र 11.65 लाख वर्ग किमी (भारत 3.21 लाख वर्ग किमी ) है।  
    • भारत पाकिस्तान के बीच 1960 ई. में हुए "सिंधु जल समझौते " के अंतर्गत भारत सिंधु व उसकी सहायक नदियों में झेलम और चिनाव के केवल 20% जल का ही उपयोग  कर सकता है, जबकि सतलज और रावी के 80 % जल का उपयोग अधिकार भारत के पास है ।  
    • सिंधु नदी के बांयी तरफ से मिलने वाली नदियों में पंचनद की ही पांच नदियां हैं। ये पांचो नदियां संयुक्त रूप से सिंधु नदी की मुख्यधारा से "मीठनकोट " के पास मिलती हैं। 
    • जास्कर , श्यांग ,शिगार , व गिलगित बांयी और से मिलने वाली अन्य प्रमुख नदियां हैं। 
    • दायीं ओर से मिलने वाली प्रमुख नदियां श्योक , काबुल , कुर्रम आदि हैं। 
    • काबुल व उसकी सहायक नदियां सिंधु में अटक के पास मिलती हैं। सिंधु नदी अटक में ही मैदानी भाग में प्रवेश करती है। 
    • दक्षिण - पश्चिम की ओर बहते हुए करांची के पूर्व में अरब सागर में गिरती है। 
    • झेलम नदी :- 
      •  यह पीरपंजाल पर्वत की पद स्थली में स्थित वेरीनाग झरने से निकलकर 212 किमी उत्तर -पश्चिम दिशा में बहती हुई वुलर झील में मिलती है। 
      • श्रीनगर इसी नदी के किनारे बसा है। यहां इस पर शिकारे चलाए जाते हैं। 
      • झेलम और रावी पाकिस्तान में झग के निकट चिनाब नदी से मिल जाते हैं। 
      • इसकी सहायक नदी किशनगंगा है , जिसे पाकिस्तान में नीलम कहा जाता है। 
    • चिनाब : -
      • इसका  प्राचीन नाम अस्किनी  था।  
      •  यह सिंधु की विशालतम सहायक नदी है , जो हिमाचल प्रदेश में चंद्रभागा कहलाती है।  
      • यह लाहुल में बड़लाचा दर्रे के दोनों ओर से चंद्र और भागा नामक दो नदियों के रूप में निकलती हैं। यही दोनों मिलकर चिनाब नदी बनती हैं। 
      • ये हिमाच्छादित पर्वतों से निकलती हैं अतः ये सदानीरा हैं। 
      • एकजुट होने के बाद चेनाब पीर- पंजाल तथा वृहत हिमालय के बीच बहती है। 
      • भारत में इसकी लम्बाई 180 किमी और अपवाह क्षेत्रफल 26,755 वर्ग किमी है। 
    •  रावी (परुष्णी  या  इरावती ) :- 
      •  यह पंचनदियों में सबसे छोटी नदी है। 
      • इसका उद्गम स्थल कांगड़ा जिले के रोहतांग दर्रे के समीप है। इसी के निकट व्यासकुंड से व्यास नदी निकलती है। 
      • इसकी घाटी को कुल्लू घाटी कहते हैं। 
      • यह पीर पंजाल के पश्चिमी ढाल को तथा धौलाधार श्रेणी के उत्तरी ढाल को अपवाहित करती है। 
      • पंजाब के मैदान में यह भारत पाक सीमा के साथ बहती है , गुरुदासपुर तथा अमृतसर जिले के साथ साथ बहने के बाद पाकिस्तान में प्रवेश करती है।  
      • पकिस्तान में सराय सिंधु के निकट यह चेनाब से मिलती है। 
    • व्यास (विपाशा ) : -
      •  इसका उद्गम कुल्लू पहाड़ी में रोहतांग दर्रे के दक्षिणी किनारे के निकट व्यास कुंड से होता है। 
      • यह धौलाधर श्रेणी को काटती है तथा कोटी एवं लार्जी के पास गहरा खड्ड बनाती है। 
      • यह सतलज की सहायक नदी है। कपूरथला के निकट "हरिके " नामक स्थान पर यह सिंधु से मिल जाती है। 
    • सतलज (शतुद्री ) : -
      •  यह मानसरोवर झील के समीप स्थित राकस ताल से निकलती है तथा शिपकिला दर्रे के पास भारत में प्रवेश करती है।
      • यह एक पूर्ववर्ती नदी है जिसे तिब्बत में लांगचेन खंभाब कहते हैं। 
      • यह जास्कर तथा वृहत हिमालय श्रेणी में महाखड्ड बनाती है।  
      • स्फीति नदी इसकी मुख्य सहायक नदी है। 
      • यह एक मात्र पूर्ववर्ती नदी है , जो हिमालय के तीन भागों को काटती है। 
      • भाखड़ा - नांगल बांध सतलज नदी पर ही बनाया गया है। 
      • भाखड़ा बांध के नीचे रोपड़ में यह नदी पंजाब के मैदानी भाग में प्रवेश करती है। 
      • भारत तिब्बत मार्ग , सतलज घाटी से होकर गुजरता है। 

Saturday, August 18, 2018

August 18, 2018

Satavahana Dynasty



सातवाहन युग

  •  उत्तर भारत में मौर्यों के सबसे बड़े देशी उत्तराधिकारी शुंग हुए उसके बाद कण्व हुए , जबकि दक्क्न और मध्य भारत में मौर्यों के उत्तराधिकारी सातवाहन हुए। 
  • सातवाहन और पुराणों में लिखित आंध्र एक ही माने जाते हैं। पुराणों में आंध्र का उल्लेख है सातवाहन का नहीं, जबकि सातवाहन अभिलेखों में आंध्र नाम नहीं मिलता। सातवाहनों के सबसे पुराने अभिलेख ईसा -पूर्व पहली सदी के हैं। 
  • कुछ पुराणों के अनुसार आन्ध्रों ने लगभग 300 वर्षों तक शासन किया जबकि सातवाहनों के शासन की भी अवधि लगभग यही थी। 
  • सातवाहनों ने लगभग ईसा पूर्व प्रथम सदी में ही कण्वों को पराजित कर मध्य भारत के कुछ भागों में अपनी सत्ता स्थापित की थी। 
  • आरम्भिक सातवाहन राजा आंध्रा में नहीं बल्कि महाराष्ट्र में थे जहाँ से उनके प्राचीनतम सिक्के और अभिलेख मिलते हैं। उन्होंने अपनी सत्ता ऊपरी गोदावरी घाटी में स्थापित की थी। 
  • धीरे धीरे सातवाहनों ने अपनी सत्ता का विस्तार कर्नाटक और आंध्रा की तरफ किया , वहां  उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंदी शक थे , ऐसी भी एक समय आया जब शकों ने सातवाहनों की महाराष्ट्र और पश्चिम भारत से उन्हें बेदखल कर दिया था। 
  • सातवाहन वंश के ऐश्वर्य को गौतमी पुत्र शातकर्णि (106 -130 ई.) के द्वारा पुनः वापस लाया गया। 
  • उसने शकों को हराया , अनेक क्षत्रिय शासकों का नाश किया , उसने खुद को एकमात्र ब्राह्मण कहा। उसने मालवा और काठियावाड़ पर भी अधिकार जमा लिया था जो कि पहले शकों के अधीन था।  
  •  उसने क्षहरात वंश का नाश किया क्योंकि उसका शत्रु नहपान इसी वंश का था। 
  • गौतमीपुत्र शातकर्णि का साम्राज्य उत्तर में मालवा से लेकर दक्षिण में कर्नाटक तक फैला था। 
  • शकों ने कोंकण समुद्र तट और मालवा पर अधिकार के लिए सातवाहनों से पुनः संघर्ष शुरू कर दिया। 
  • सौराष्ट्र के शक शासक रूद्र दामन प्रथम (130 -150 ई. ) ने सातवाहनों को दो बार हराया , मगर वैवाहिक संबंधों के कारण उनका नाश नहीं किया। 
  • भौतिक संस्कृत : -
    •  सातवाहन शासक ब्राह्मण थे और वैष्णव देवताओं के उपासक थे , फिर भी उन्होंने भिक्षुओं को ग्रामदान दे कर बौद्ध धर्म को बढ़ावा दिया।  उनके काल में बौद्ध धर्म के महायान संप्रदाय का विकास था। 
    •  सातवाहनों के समय में कृषि यंत्रो का विकास हुआ और लोहे का प्रयोग अच्छी तरह से हुआ। 
    • करीमनगर जिले में उत्खनन में लोहार की एक दुकान भी मिली थी , संभवतः वे वारंगल और करीमनगर के लौह अयस्क का प्रयोग करते थे। 
    • सातवाहनों ने सोने के सिक्के नहीं चलवाए अर्थात वे इसका प्रयोग बहुमूल्य धातु की तरह किये। उनके सिक्के अधिकांशतः शीशे के हैं जो की दक्क्न में पाए गए , उन्होंने तांबे और कांसे की मुद्रा भी चलाई। 
    • सातवाहन लोग  धान की रोपाई करना जानते थे। 
    • करीमनगर जिले के पेड्डबंकूर में पकी ईंट और छत में लगने वाला चिपटे छेददार खपड़े का प्रयोग मिलता है। यहाँ द्वितीय शताब्दी के बने ईंटों के 22 कुँए भी मिले हैं। 
    • ब्राह्मणों को भूमि अनुदान या जागीर देने वाले प्रथम शासक सातवाहन ही हुए , हालाँकि भिक्षुओं के लिए इस प्रकार के अनुदान के उदाहरण अधिक मिलते हैं। 
    • इस काल में गांधिक वे शिल्पी थे जो इत्र आदि बनाते थे ,वर्तमान उपनाम गाँधी यहीं से उत्पन्न हुआ है। 
    • यह समाज पुरुष प्रधान नहीं था क्योंकि राजाओ के नाम के आगे माता का नाम जुड़ा था, इनके समाज में माता की प्रतिष्ठा अधिक थी लेकिन सिंहासन का उत्तराधिकारी पुत्र ही होता था। 
    • सातवाहनों की प्रशासनिक इकाइयाँ लगभग अशोक के समय की तरह ही रही ,जिला को आहार ही कहा जाता था , उनके अधिकारी मौर्य काल की तरह ही अमात्य -महामात्य कहलाते थे। 
    • गौर करने लायक है कि सेनापति को प्रांत का शासनाध्यक्ष या गवर्नर बनाया जाता था। 
    • ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन का काम गौल्मिक  को सौंपा जाता था। गौल्मिक सेना टुकड़ी का प्रधान होता था। 
    • सातवाहन  शासन में दमन नीति का प्रमुख स्थान था। 
    • सातवाहन राज्य में सामंतों की तीन श्रेणियां थीं , श्रेणी का सामंत राजा कहलाता था जिसे सिक्के ढालने का अधिकार था , द्वितीय श्रेणी का महाभोज कहलाता था  और तृतीय श्रेणी का सेनापति कहलाता था। 
    • सातवाहन काल में पश्चिमोत्तर दक्कन और महाराष्ट्र में पत्थरों को काट कर चैत्य (बौद्ध मंदिर ),और विहार (भिक्षु निवास )बनाए गए।  सबसे मशहूर चैत्य पश्चिमी दक्कन में कार्ले का है। 
    • नागार्जुनकोंड और अमरावती के स्तूप अत्यधिक मशहूर हुए। 
    • सात वाहनों की राजकीय भाषा प्राकृत थी। सभी अभिलेख प्राकृत और ब्राह्मी लिपि में लिखे गए हैं। 
    • प्राकृत ग्रन्थ गाथाहासत्तसई (गाथासप्तशती )  हाल नामक सातवाहन राजा की रचना बताई जाती है। 

Friday, August 17, 2018

August 17, 2018

भारत के भू आकृतिक भाग




भारत के भू आकृतिक भाग

उच्चावच एवं संरचना के आधार पर भारत को पांच भू आकृतिक भागों में बाँटा जा सकता है -



उत्तर का पर्वतीय क्षेत्र की 
  • भारत की उत्तरी सीमा पर विश्व की सबसे ऊँची एवं पूर्व -पश्चिम  में विस्तृत सबसे बड़ी पर्वत माला है। यह  विश्व की नवीनतम मोड़दार पर्वतमाला है। 
  • हिमालय की पर्वत श्रेणियां प्रायद्वीपीय पत्थर की तरफ उत्तल और तिब्बत की तरफ अवतल हो गयी हैं। 
  • पश्चिम से पूर्व की तरफ पर्वतीय भाग की ऊंचाई बढ़ती है लेकिन चौड़ाई घटती है एवं ढाल भी तीव्र होता जाता है। 
  • उत्तर के पर्वतीय क्षेत्र को चार प्रमुख समानांतर पर्वत श्रेणी क्षेत्रों में बाँटा जा सकता है :- 
  • 1. ट्रांस हिमालय : - 
    •  इसके अंतर्गत काराकोरम ,लद्दाख , जास्कर आदि पर्वत श्रेणियां हैं। 
    • इनका निर्माण हिमालय से भी पहले हो चुका था। 
    • ये मुख्यतः पश्चिमी हिमालय में हैं। 
    • गॉडविन आस्टिन (8611 मी. ) या K2 , काराकोरम श्रेणी की सर्वोच्च चोटी है, जो कि भारत की सबसे ऊँची चोटी है। 
    • ट्रांस हिमालय वृहत हिमालय से "इंडो सांग्पो शचर जोन" के द्वारा अलग होती है। 
  • 2. हिमाद्रि या सर्वोच्च या वृहद् हिमालय :- 
    • यह हिमालय की सबसे ऊँची श्रेणी है , इसकी औसत ऊंचाई 6000 मी. है जबकि चौड़ाई 120 से 190 किमी है। 
    • विश्व के लगभग सभी महत्वपूर्ण शिखर यथा एवरेस्ट , कंचनजंघा , नंगा पर्वत , नंदा देवी , कामेट , नामचा बरवा आदि इसी में आते हैं। 
    • वृहद् हिमालय , लघु हिमालय से  "मेन सेंट्रल थ्रस्ट " के द्वारा अलग होता है। 
  • 3. हिमाचल श्रेणी अर्थात लघु या मध्य हिमालय  :-
    •  इसकी औसत चौड़ाई 80 से 100 किमी एवं सामान्य ऊंचाई 3700 से 4500 मी. है। 
    • पीरपंजाल , धौलाधार , नागटिब्बा ,मसूरी , महाभारत आदि श्रेणियां इसी पर्वत श्रेणी का भाग हैं। 
    • वृहद्व व लघु हिमालय के मध्य कश्मीर घाटी , लाहुल -स्पीति , कुल्लू व कांगड़ा घाटियां मिलती हैं। 
    • यहां के अल्पाइन चरागाहों को कश्मीर में मर्ग और उत्तराखंड में वुग्याल या पयार  कहते हैं। 
    • इसी श्रेणी में शिमला , कुल्लू , मनाली ,मसूरी , दार्जिलिंग आदि स्थान पड़ते हैं। 
    • लघु हिमालय , शिवालिक से मेन बॉउंड्री फॉल्ट के द्वारा अलग होता है। 
  • 4.  शिवालिक अथवा निम्न या बाह्य हिमालय  : -
    •  यह 10 से 50 किमी चौड़ा और 900 से 1200 मी. ऊँचा है। यह खंडित रूप में है। 
    • यह हिमालय का नवीनतम भाग है। 
    • शिवालिक और लघु हिमालय के बिच कई घाटियाँ हैं जिन्हें पश्चिम में दून  भी कहते हैं , जैसे देहरादून , हरिद्वार आदि। 
    •  निचले भाग को तराई कहते हैं, यह दलदली और वनाच्छादित प्रदेश है। 
  • हिमालय के उत्तरी पश्चिम और उत्तरी पूर्वी छोरों पर सिंधु व दिहांग गार्ज मिलते हैं। 
  • तिब्बत के पत्थर की तरफ ढाल मंद है अतः हिमालय के उत्तर में हिमनदों का जमाव अधिक मिलता है। 

  • हिमालय क्षेत्र में काराकोरम , शिपकिला ,नाथुला , बोमडिला आदि दर्रे भी मिलते हैं। 
  • जम्मू कश्मीर के लद्दाख में स्थित काराकोरम दर्रा भारत का सबसे ऊँचा दर्रा (5654 मी. )है, यहां से चीन जाने वाली एक सड़क भी बनाई गई है। 
  • बुर्जिल दर्रा श्रीनगर से गिलगित को जोड़ती है। 
  • जोजिला दर्रा , जास्कर श्रेणी में है और श्री नगर से लेह को जोड़ता है। 
  • पीरपंजाल दर्रे से कुलगाँव से कोठी जाने का मार्ग गुजरता है। 
  • बनिहाल दर्रे से जम्मू से श्रीनगर का मार्ग गुजरता है। जवाहर सुरंग इसी में स्थित है। 
  • बड़ालाचला दर्रे से मंडी से लेह जाने का मार्ग गुजरता है। 
  • थांगला , माना , निति , लिपुलेख दर्रे उत्तराखंड के कुमाऊं श्रेणी में हैं। इन्ही से मानसरोवर झील और कैलाश घाटी का मार्ग गुजरता है। 
  • नाथुला और जेलेप्ला दर्रे सिक्किम में हैं। यहां से दार्जिलिंग और चुम्बी घाटी से होते हुए तिब्बत जाने का मार्ग गुजरता है। 
  • बोमडिला और यांगयाप दर्रा , अरुणाचल प्रदेश में है। बोमडिला दर्रे से तवांग घाटी होकर तिब्बत का मार्ग गुजरता है जबकि यांगयाप दर्रे के पास ही ब्रह्मपुत्र नदी भारत में प्रवेश करती है। 
  • दिफू और पांगसांड दर्रा अरुणाचल प्रदेश में भारत- म्यांमार सीमा पर है। 
  • मणिपुर में स्थित तुजू दर्रे से इम्फाल से तामू व म्यांमार जाने का मार्ग गुजरता है। 

विभिन्न नदियों ने हिमालय क्षेत्र को 4 प्रमुख प्राकृतिक भागों में एक दूसरे से पृथक कर दिया है : -


कश्मीर या पंजाब हिमालय :-  
  • सिंधु और सतलज के बीच 560 किमी में फैला हुआ है। 
  • यहां हिमालय क्रमिक ऊंचाई प्राप्त करता है। 
  • जास्कर व पीरपंजाल श्रेणी इसी के भाग हैं। 
  • हिमालय की चौड़ाई यहां सर्वाधिक है जो कि लगभग 250 से 400 किमी है। 
कुमाऊँ हिमालय :-
  • यह सतलज और काली नदियों के बीच 320 किमी में फ़ैला है। 
  • यह उत्तराखंड क्षेत्र में विस्तृत है। 
  • नंदा देवी , कामेट , बद्रीनाथ , केदारनाथ , त्रिशूल आदि इसके प्रमुख शिखर हैं।  
नेपाल हिमालय :-
  • यह काली और तीस्ता नदियों के बीच 800 किमी की दूरी में फैला है। 
  • यहां हिमालय की चौड़ाई अत्यंत कम है , परन्तु हिमालय के सर्वोच्च शिखर यथा एवरेस्ट ,कंचनजंगा , मकालू  यहीं पर हैं। 
असम हिमालय :-
  • यह तीस्ता तथा दिहांग नदियों के बीच 720 किमी की दूरी में फैला है। 
  • यहां हिमालय की ऊंचाई पुनः कम होती जाती है।



प्रायद्वीपीय पठार 
  • यह प्राचीन गोंडवाना का त्रिभुजाकार भाग है, जिसकी औसत ऊंचाई 600 से 900 मी है। 
  • अरावली , राजमहल और शिलांग पहाड़ियां इसकी उत्तरी सीमा पर हैं। 
  • प्रायद्वीपीय पठार का ढाल उत्तर और पूर्व की तरफ है जबकि दक्षिण भाग में इसका ढाल पश्चिम से  पूर्व की तरफ है। 
  • प्रायद्वीपीय पठार कई भागों में बंटा है -
    •  मालवा का पठार 
    • बैतूल और बघेलखंड का पठार (मध्य प्रदेश )
    • बुन्देलखंड का पठार 
    • दंडकारण्य पठार (उड़ीसा , छत्तीसगढ़  व आंध्र प्रदेश )
    • रायलसीमा का पठार (कर्नाटक व आंध्र प्रदेश )
    • तेलंगाना का पठार 
    • शिलॉन्ग का पठार 
    • हजारीबाग और छोटा नागपुर का पठार (झारखण्ड )
  • अरावली श्रेणी विच्छिन्न पहाड़ी श्रृंखला रूप में गुजरात से दिल्ली तक विस्तृत है। 
  • इसकी चौड़ाई दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूर्व की तरफ क्रमशः घटती जाती है। 
  • अरावली की अधिकतम ऊंचाई माउंट आबू के गुरु शिखर(1722 मी.) पर है। 
  •  विंध्याचल अत्यधिक पुराना व घर्षित मोड़दार पर्वत श्रेणी है , यह मालवा पठार के दक्षिण में है व उत्तरी भारत को दक्षिण भारत से अलग करता है। 
  • सतपुड़ा ब्लॉक पर्वत का उदाहरण है। इसके दोनों तरफ नर्मदा और ताप्ती की भ्रंश घाटियां हैं। यह विन्धयाचल के समांतर व पश्चिम में राजपिपला पहाड़ियों से शुरू हो कर महादेव और मैकाल पहाड़ियों के रूप में छोटा नागपुर पठार की पश्चिमी सीमा तक विस्तृत  है। सतपुड़ा की सबसे ऊँची चोटी महादेव पहाड़ी के पंचमढ़ी के निकट धूपगढ़  है। 
  • मैकाले पहाड़ी का सर्वोच्च शिखर अमरकंटक है जहां से नर्मदा कर सोन नदिओं का उद्गम होता है। 
  • मैकाले से पूर्व की तरफ छोटा नागपुर और राजमहल की पहाड़ियां हैं। 
  • मेघालय की गारो -खासी -जयंतिया पहाड़ियां भी वस्तुतः दक्षिणी प्रायद्वीप का ही अंग हैं। 
  • शिलॉन्ग पठार , छोटा नागपुर का ही अग्र  भाग है। 
पश्चिमी घाट
  • यह ताप्ती के मुहाने से लेकर कन्याकुमारी के अंतरीप तक1600 किमी की लंबाई में फैला है। 
  • यह वह भ्रंश है जो अफ्रीका के भारत से  अलग होने में बना था। 
  • पश्चिमी घाट के उत्तर में गिर की पहाड़ियां हैं जहां प्रसिद्द एशियाई शेर पाए जाते हैं। 
  • पश्चिमी घाट को सह्याद्रि भी कहा जाता है। 
  • थालघाट , भोरघाट , पालघाट इसके प्रमुख दर्रे हैं। 
  • महाराष्ट्र के उत्तरी सह्याद्रि में स्थित थालघाट (583 मी.)दर्रे  से मुंबई -नागपुर-कोलकाता रेल व सड़क मार्ग गुजरता है। 
  • भोरघाट भी उत्तरी सह्याद्रि में है , इससे मुंबई - पुणे -बेलगाँव -चेन्नई रेल व सड़क मार्ग गुजरते हैं। 
  • पालघाट केरल में है,यह नीलगिरि व अन्नामलाई श्रेणी के बीच स्थित है। 
  • उत्तरी सह्याद्रि की सबसे ऊँची चोटी कलसुबाई है। 
  • महाबळेश्वर भी इसकी ऊँची छोटी है जहाँ से कृष्णा नदी का उद्गम होता है। 
  • नीलगिरि की अधिकतम ऊंचाई डोडाबेटा (2637 मी.)है। 
  • प्रसिद्ध स्थान ऊटी या उटकमंडलम नीलगिरि में ही स्थित है। 
  • नीलगिरि के दक्षिण में अन्नामलाई श्रेणी है जिसमें दक्षिण भारत व  पश्चिमी घाट का सर्वोच्च शिखर अनाईमुडी (2695 मी.) है। 
  • शेनकोट्टा गैप कार्डेमम पहाड़ियों में है। 
  • पर्यटक स्थल,कोडायकनाल  पालनी पहाड़ियों में स्थित है। 

 पूर्वी घाट 
  • यह श्रृंखला रूप में नहीं मिलती हैं क्योंकि गोदावरी ,कृष्णा , कावेरी आदि नदियों ने जगह - जगह इसे काट दिया है। 
  • पूर्वी घाट की सबसे ऊँची चोटी उड़ीसा के निकट " अरायोकोंडा" (विशाखापत्तनम चोटी) है। 
  • पूर्वी भाग के सबसे उत्तरी भाग में उत्तरी पहाड़ी या उत्तरी सरकार , मध्य में कुडप्पा जबकि दक्षिण में इसे तमिलनाडु पहाड़ी के नाम से जाता है। 
  • नल्लामल्ला , एर्रामल्ला,वेलीकोण्डा  व पालकोण्डा कुडप्पा पहाड़ी के एवं शेवराय व जवादी तमिलनाडु पहाड़ी के अंतर्गत आते हैं। 
  • इसकी औसत ऊंचाई 600 मी. है , नीलगिरि के निकट दक्षिण में यह सर्वाधिक ऊंचाई प्राप्त करती है। 


उत्तर का विशाल मैदान
  • इसे सिंधु -गंगा -ब्रह्मपुत्र का मैदान भी कहा जाता है। यह जलोढ़ अवसादों से बना है। 
  • अंबाला के आसपास की भूमि इसमें जल विभाजक का कार्य करती है क्योंकि इसके पूर्व की नदियां बंगाल की खाड़ी में और पश्चिम की नदियां अरब सागर में गिरती हैं। 
  • विशिष्ट धरातलीय स्वरुप के आधार पर इस मैदान को चार भागों में बाँटा जा सकता है - 
    •  भाबर प्रदेश :- यह शिवालिक की तलहटी में सिंधु से लेकर तीस्ता तक अविच्छिन्न रूप से मिलता है। इसकी चौड़ाई 8 से 16 किमी है। कंकड़ पत्थरों की अधिकता के कारण यहां नदियां विलुप्त हो जाती हैं। 
    • तराई प्रदेश  : - यह भाबर के दक्षिणी भाग में है।  अत्यधिक आर्द्रता के कारण यहां भूमि दलदली होती है। भाबर में विलुप्त नदियां यहां पुनः सतह पर आ जाती हैं , परन्तु गति धीमी होती है। यहां घने वनों के कारण जैव विविधता का भंडार है। 
    • बांगर प्रदेश  : - यह मैदानी क्षेत्र का वह उच्च भाग है जहाँ  बाढ़ का पानी नहीं पंहुचता।  इसका निर्माण पुराने जलोढ़ों से हुआ है और इसमें कंकड़ पत्थर की अधिकता है।  इसे कहीं कहीं भुड़ू  भी कहा जाता है। 
    • खादर प्रदेश  : - यह नवीन जलोढ़ से निर्मित है।  यहां बाढ़ हर वर्ष नई उर्वर मिटटी लाता है अतः इसे "कछारी प्रदेश " या "बाढ़ का मैदान " भी कहा जाता है।  खादर का ही विस्तार आगे चलकर डेल्टा रूप में भी हुआ है। 
  • पंजाब के पश्चिम का मैदान मुख्यतः बांगर से निर्मित है। 
  • पश्चिमी सप्तसिंधु प्रदेश जहाँ आर्यों ने अपनी पहली बस्ती बसाई थी , में विभिन्न नदियां यथा सिंधु , झेलम , चिनाव , रावी ,व्यास ,सतलज होने के कारण हर दो नदियों के बीच दोआब क्षेत्र बनते हैं। 
  • सतलज की पुरानी धारा ही राजस्थान में घग्घर के नाम से जानी जाती है। 
  • पंजाब से पूर्व जाने पर गंगा - यमुना दोआब है जो कि पुराने बांगर जलोढ़ से निर्मित है। 
  • प्रायद्वीपीय पठार और हुगली के बीच के क्षेत्र को गिरिपदीय मैदान भी कहा जा सकता है। 
तटवर्ती मैदान
  • प्रायद्वीपीय पठार के पूर्व और पश्चिम में दो संकरे तटीय मैदान हैं जिन्हें क्रमशः पूर्वी तटीय व पश्चिमी तटीय मैदान कहा जाता है। 
  •  इनका निर्माण सागरीय तरंगों द्वारा अपरदन व निक्षेपण एवं पठारी नदियों द्वारा लाए गए अवसादों के जमाव से हुआ है। 
  • पश्चिमी तटीय मैदान  गुजरात से कन्याकुमारी के तटीय क्षेत्र में विस्तृत है। यह संकरी जलोढ़ पट्टी है जिसके बीच बीच में पहाड़ भी हैं। नर्मदा ताप्ती के मुहाने पर यह सबसे ज्यादा चौड़ी है। काठियावाड़  क्षेत्र में समुद्री निक्षेप अधिक हैं , जबकि काठियावाड़ के मैदानी क्षेत्र में रेगुर मिट्टी (बेसाल्ट लावा के अपक्षय से निर्मित काली मिट्टी ) है। गुजरात से गोवा तक का मैदान कोंकड़ तट कहलाता है।  गोवा से कर्नाटक के मंगलौर का भाग कन्नड़ तट कहलाता है , यह अत्यधिक संकरा है। मंगलौर से कन्याकुमारी का तटीय मैदान मालाबार तट कहलाता है। मालाबार तट में लैगून की प्रधानता है जिन्हे कयाल कहा जाता है। 
  • पूर्वी तटीय मैदान , पश्चिमी तटीय मैदान की तुलना में अधिक चौड़ा है। नदियों के डेल्टाई भागों में इसकी चौड़ाई और भी बढ़ जाती है। दक्षिणी भाग में इसकी अधिकतम चौड़ाई है। 
  • उड़ीसा और आंध्र प्रदेश के तटवर्ती मैदान को उत्कल तट , कलिंग तट या उत्तरी सरकार कहते हैं। 
  • कृष्णा -गोदावरी डेल्टा से  कन्याकुमारी तक विस्तृत आंध्रप्रदेश से तमिलनाडु तक विस्तृत तटीय मैदान को कोरोमंडल तट कहा जाता है। 
  • कम कटा छँटा होने की वजह से इस तट पर प्राकृतिक पोतश्रयों की कमी है। 
द्वीपीय भाग
  •   भारत के मुख्य द्वीपीय भाग अंडमान -निकोबार व लक्षद्वीप हैं। 
  • अंडमान निकोबार द्वीप समूह बंगाल की खाड़ी में हैं , लैंडफाल द्वीप इस द्वीप का सबसे उत्तरी द्वीप है। 
  • कोको जलमार्ग इसे म्यांमार के कोको द्वीप से अलग करता है जहां चीन ने इलेक्ट्रॉनिक निगरानी तंत्र लगाया है। 
  • नारकोंडम द्वीप में दो सुषुप्त और बैरन द्वीप में एक सक्रिय ज्वालामुखी है। 
  • उत्तरी अंडमान एक पर्वतीय क्षेत्र है जहां सैंडल पीक नामक महत्वपूर्ण चोटी है। 
  • मध्य अंडमान , निकोबार समूह का सबसे बड़ा द्वीप है। 
  • दक्षिण अंडमान में इस समूह की राजधानी पोर्टब्लेयर है। प्रसिद्ध सेल्युलर जेल यहीं स्थित है। 
  • माऊंट हेरियट और माऊंट हेवलॉक यहां के अन्य द्वीप हैं जहां राष्ट्रीय पार्क भी हैं। 
  • लघु अंडमान , अंडमान समूह का सबसे दक्षिणी भाग है , 10* चैनल इसे कार निकोबार से अलग करता है। 
  • ग्रेट निकोबार , अंडमान - निकोबार द्वीप समूह का दक्षिणतम द्वीप है , इंदिरा पॉइण्ट यही पर है। 
  • अरब सागर में स्थित लक्षद्वीप समूह , एक प्रवाल द्वीप समूह है। 
    • ये सागरीय चबूतरों पर चूने पर निर्वाह करने वाले जीवों के अस्थि पंजरों से निर्मित हैं। 
    • अमीनदीव, लक्षद्वीप का सबसे बड़ा द्वीप है। 
    • कवरत्ती , लक्षद्वीप की राजधानी है। यह मिनिकॉय द्वीप से 9* चैनल द्वारा अलग होता है। 
    • मिनिकॉय द्वीप और मालदीव 8* चैनल से अलग होते हैं। 

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